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173 नव पंजीकृत अधिवक्ताओं को शपथ दिलाई गई

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय परिसर में आज नव पंजीकृत अधिवक्ताओं के लिए सामूहिक शपथ समारोह का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे, जबकि प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर ने समारोह की अध्यक्षता की।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर युवा अधिवक्ताओं को न्यायिक व्यवसाय अपनाने के लिए बधाई दी। उन्होंने आशा जताई कि युवा अधिवक्ता विधिक व्यवसाय में उत्कृष्टता हासिल करेंगे और समाज को बहुमूल्य सेवाएं प्रदान करेंगे।
श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि विधि न केवल सामाजिक नियंत्रण अपितु सामाजिक बदलाव का संवाहक भी है। विधि शिक्षा के माध्यम से छात्र समाज में अपनी भूमिका का सही निर्वहन करने में सक्षम होते हैं। विधि, विधिक शिक्षा और विकास आधुनिक विकसित समाज में आपस में मिले हुए हैं। वर्तमान समाज कल्याण राज्य के रूप में विकसित होने के लिए प्रयासरत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के स्वतंत्रता आन्दोलन में बार काउंसिल का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। संसदीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करने में अधिवक्ताओं की विशिष्ट भूमिका रही है। लोकतंत्र के सुदृढ़ीकरण से संसदीय विचार-विमर्श को दिशा देने में भी सहायता मिली है। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार, नागरिक स्वतंत्रता और संवैधानिक लोकतंत्र को आगे बढ़ाने में अधिवक्ताओं की भूमिका विशेष तौर पर सराही जाती है। अब अधिवक्ताओं की भूमिका का अवलोकन विस्तृत परिप्रेक्ष्य में किया जाता है और विधि शिक्षा के अध्यापक, न्यायाधीश, अधिवक्ता और आम आदमी भी अब इस सम्बन्ध में अधिक जागरूक हो गए हैं।
श्री वीरभद्र सिंह ने इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए बार काउंसिल को बधाई दी। राज्य बार संघ की मांग पर उन्होंने विश्वास दिलाया कि शिमला में राष्ट्रीय विधि विद्यालय की स्थापना के लिए राज्य सरकार हर संभव सहायता प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल की अधिकारिक वैबसाईट का शुभारम्भ भी किया। उन्होंने आशा जताई कि इस वैबसाईट से विधिक मामलों में जानकारी प्राप्त होने में सहायता मिलेगी।
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर ने इस अवसर पर कहा कि विधिक व्यवसाय से जुड़े व्यक्तियों से समाज उच्च अपेक्षाएं रखता है। विधि व्यवसायियों से अपेक्षा की जाती है कि वे सत्य एवं न्याय की स्थापना को सर्वोच्च अधिमान दें। बार सदस्यों का स्थान विशेष है और वे न्यायिक प्रणाली के आधार स्तम्भ हैं। उन्होंने कहा कि यदि न्यायिक प्रणाली अप्रभावी, अक्षम एवं निष्प्रभावी हो तो न्याय का नियम नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि बार के सदस्यों द्वारा अपने मुवक्किलों के मामलों के संचालन में लापरवाही विधिक व्यवसाय के वैभव को ध्वस्त कर सकती है।
न्यायमूर्ति खानविलकर ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय बार संघ के सदस्यों एवं अन्य के कार्य निष्पादन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वे न केवल अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक हैं, बल्कि अपने मुवक्किलों और वादियों के हित के विषय में भी चिंतित हैं।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल की आधिकारिक वैबसाईट के शुभारम्भ से अब इसकी जानकारी विश्व व्यापी हो गई है। उन्होंने विधिक व्यवसाय में प्रवेश पर युवा अधिवक्ताओं का स्वागत किया।
हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल के अध्यक्ष श्री श्रवण डोगरा ने 173 नव पंजीकृत अधिवक्ताओं को शपथ दिलाई।
बार काउंसिल के उपाध्यक्ष श्री विकास राठौर ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी.डी. सूद, न्यायमूर्ति कुलदीप सिंह और न्यायमूर्ति राजीव शर्मा, कार्यवाहक मुख्य सचिव श्री पी.मित्रा, प्रधान सचिव विधि श्री चिराग भानु सिंह, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायलय बार संघ के अध्यक्ष श्री अश्विनी पाठक, शिमला जिला बार संघ के अध्यक्ष श्री प्रेम सिंह नेगी, वरिष्ठ अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी तथा विधि महाविद्यालयों के छात्र इस अवसर पर उपस्थित थे।

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