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हिमाचल में महिला उत्पीड़न? चिंता न करें 9459100100 पर एसएमएस करें

धर्मशाला (अरविंद शर्मा)
हिमाचल में महिला उत्पीड़न? चिंता न करें
9459100100 पर एसएमएस करें और महिला पुलिस की देखें त्वरित कार्रवाई
2010 में शुरू एसएमएस सेवा से अब तक 400 से अधिक मामलों का निबटारा
महिला उत्पीडन को ले कर हिमाचल परदेश में एसएमएस अलर्ट सेवा सक्रिय पुलिस की प्रतिक्रिया की वजह से काफी लोकप्रियता हासिल कर चुकी है, विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा 2010 में शुरू की गयी इस सेवा के बेहतर नतीजे सामने आये है I आंकड़े पर गौर करें तो पता चलता है की पिछले छह महीनों में, महिलाओं से छेड़छाड़ से संबंधित मामलों में से अधिकांश के साथ एसएमएस अलर्ट के आधार पर 22 प्राथमिकियां पंजीकृत की गयीं I इस योजना के अनतेरगत परदेश में कहीं भी किसी भी समय यदि कोई लड़की अथवा महिला छेड़छाड़ अथवा अन्य कारणों से खुद को अशुरक्षित महसूस करती है तो वह एक एसएमएस (9459100100) पर भेज दे, इसके तुरत बाद हिमाचल पुलिस का महिला कांस्टेबल दल त्वरित कार्रवाई में जुट जाता है I कंट्रोल रूम एसएमएस भेजे जाने वाले स्थान के करीव के थाना को सूचित करता है ओर पुलिस थोड़े ही समय में पीडिता के पास पहुँच जाता है I इस योजना के अंतर्गत जरूरत पड़ने पर बचे भी एसएमएस कर परिवार की बुजुर्ग महिलाओं की रक्षा कर सकते हैं जहां घरेलू हिंसा सहित महिलाओं के खिलाफ अन्य अपराध हो रहे हों I
” 1 जनवरी 2013 से लेकर इस हफ्ते तक कुल 1,579 एसएमएस प्राप्त हुए है, और लगभग सभी पर कारवाई राज्य मुख्यालय स्तर पर या जिलों में थाना स्तर पर चल रही है या की जा चुकी है I इनमें से 775 महिलाओं के उत्पीड़न से संबंधित मामलों का निपटारा कर दिया गया है जबकि 333 मामलों में करवाई चल रही है, “पुलिस (डीजीपी) बी कमल कुमार के राज्य के महानिदेशक ने कहा.
एसएमएस सेवा सभी अपराध से निपटने के लिए मई 2010 में शुरू किया की गयी थी I जबकि अपने उद्घाटन वर्ष में 889 एसएमएस, 16 एफआईआर के पंजीकरण किया गया Iऔर हर साल यह संख्या बदती जा रही है . 2011 में1682 एस एम् एस के लिए संख्या 44 प्राथमिकी दर्ज कराई और 2012 में, यह आगे 2006 एसएमएस से अब तक 2013 में 25 प्राथमिकी दर्ज करने के लिए बढ़ाया जा रहा है के साथ गुलाब, में जिसके परिणामस्वरूप भेजा गया था. एफआईआर की कम संख्या के बारे में पुलिस ने यह प्राथमिकी दर्ज की औपचारिक दर्ज कराने के बिना पुलिस के हस्तक्षेप की वजह से है कि कहते हैं

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