Header ad
Header ad
Header ad

हिमाचल प्रदेश में मत्स्य मूल्यांकन एवं विकास पर दो दिवसीय कार्यशाला का हुआ आयोजन

24 जुलाई, बिलासपुर : हिमाचल प्रदेश में मत्स्य मूल्यांकन एवं विकास’’ विषय पर मत्स्य निदेशालय बिलासपुर द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला आज बचत भवन बिलासपुर में संपन्न हो गई। समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए मत्स्य विभाग के अतिरिक्त सचिव श्री अनुपम कश्यप ने बताया कि इस दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान विभिन्न राज्यों से आए मत्स्य विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिकों, निदेशक, सेवानिवृत निदेशकों के अनुभवों से जो महत्वपूर्ण जानकारियां सांझा की गई उनका मत्स्य पालकों व मत्स्य उत्पादकों को व्यापक स्तर पर लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि ट्राउट मछली पालकों को विशेषज्ञांें व मत्स्य अधिकारियों के माध्यम से मछली पालन से संबंधित ज्ञानवर्धक जानकारियां हासिल हुई हैं तथा उनके इन अनुभवों से जहां मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलेगा वहीं मत्स्य पालक निश्चित तौर पर अच्छी आय अर्जित कर सकेंगे। इस दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान मछली पालन, मत्स्य विकास तथा मत्स्य से संबंधित नई-नई हेचरी इत्यादि विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य मात्र चर्चा तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि मत्स्य अधिकारियों व वैज्ञानिकों को वर्तमान में मछली पालकों को आ रही समस्याओं पर अनुसंधान कर मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए हल खोजने चाहिए ताकि आम मछली पालकों तक इसका लाभ आसानी से पहुंच सके। उन्होंने विभाग की सात टीमों का गठन किया जिनमें सहायक निदेशक मत्स्य, वरिष्ठ मत्स्य अधिकारी, मत्स्य अधिकारी शामिल होंगे तथा इन सभी को इस कार्यशाला के दौरान की गई महत्वपूर्ण चर्चाओं पर आधारित विभिन्न विषय दिए गए तथा इन विषयों पर 25 दिन के भीतर रिपोर्ट ईमेल द्वारा प्रधान सचिव मत्स्य शिमला को पहुंचाने के निर्देश दिए गए ताकि विभाग द्वारा विस्तृत रूप से इस पर गहन अध्ययन किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की रिपोर्ट निचले स्तर से तैयार की जाएगी ताकि इस पर विचार विमर्श करके जो सार्थक परिणाम होंगे उन्हें मछली पालकांे तक पहुंचाया जा सके।
दूसरे दिन के सत्र में शक्ति सिंह एगलिंग एसोसिएशन के सदस्य ने कहा कि एंगलिंग प्रशिक्षण के लिए स्कूल खोलने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में न केवल भारत से बल्कि विश्व के अन्य देशों से भी पर्यटक आते हैं जिसके दृष्टिगत एंगलिंग स्थलों को विकसित किया जाना अति आवश्यक हैं।कार्यशाला में वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक एनडीएफबी हैदराबाद डा. गोपाल रेड्डी ने मछली उत्पादन तथा विकास को लेकर विभिन्न योजनाओं की विस्तार से जानकारी प्रदान करने के साथ-साथ बहुमूल्य सुझाव भी दिए। उन्होंने बताया कि दस प्रतिशत मछली बाहर के देशों को निर्यात की जाती है। उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित विभागाधिकारियों को फिश कल्चर को बढ़ावा देने का आह्वान किया। इस अवसर पर रिटायर निदेशक मत्स्य श्री कुलदीप कुमार ने भी फिशरीज की संभावनाओं तथा मछुआरों की आर्थिकी का जिक्र करते हुए बताया कि हिमाचल के मछुआरों की आर्थिक स्थिति अच्छी है तथा अधिकतर मछुआरे पक्के मकानों में रहते हैं। उन्होंने बताया की ट्राउट मछली का उत्पादन भारत में केवल हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जलाशयों में किया जाता है। उन्होंने मछली उत्पादन के लिए मछली की किस्मों को बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने बताया कि महाशाीर अच्छी किस्म की मछली है इससे अच्छी आय अर्जित की जा सकती है।
इस अवसर पर श्री खेम सिंह वरिष्ठ मत्स्य अधिकारी ने अपनी प्रेजेंटेशन में नदी, जलाशयों में महाशीर के उत्पादन तथा इसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने नैनीताल में गंबुशियां मछली की चर्चा करते हुए बताया कि ये मछली की ऐसी प्रजाति है जो अन्य मछलियों को खत्म कर देती हैं।
इस कार्यशाला में केज फिश कल्चर को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न किस्म की मछलियों की उपयोगिता पर भी चर्चा की गई।
इस अवसर पर मत्स्य निदेशक श्री गुरचरण सिंह ने विभिन्न क्षेत्रों से आए वैज्ञानिकों तथा विभिन्न राज्य के मत्स्य निदेशकों का धन्यावाद करते हुए बताया कि इस दो दिवसीय कार्यशाला से इस विभाग के अधिकारी तथा जो मछली पालक प्रदेश के अन्य भागों से आए वे निश्चित तौर पर लाभान्वित हुए हैं। उन्होंने मछुआरों के लिए बीमा राशि को एक लाख से बढ़ाकर दो लाख करने का भी आश्वासन दिया।
ंइस अवसर पर उपायुक्त बिलासपुर डा. अजय शर्मा, एडीएम श्री प्रदीप ठाकुर , मत्स्य विभाग के सभी उपनिदेशक, सहायक निदेशक सहित कई गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।

Share

About The Author

Related posts

Leave a Reply

 Click this button or press Ctrl+G to toggle between multilang and English

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Please Solve it * *