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हिमाचल के खाद्यान्न भंडार के नाम से मशहूर ऊना जिला

ऊना , 8 जुलाई ( राजीव भनोट ) ऊना जिला के साथ कई गौरव जुड़े हैं। यह जिला प्रदेश के प्रगतिशील जिलों में शुमार होने के साथ – साथ कृषि , दुग्ध उत्पादन और नींबू प्रजाति के फ लों की पैदावार में अपना विशेष स्थान रखता है। कृषि की नवीनतम तकनीकें अपनाने और वैज्ञानिक ढंग से खेती को प्रोत्साहन मिलने के कारण जिला ऊना के कदम कृषि उत्पादन में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों से इस जिला ने खाद्यान उत्पादन में एक नई छंलाग लगाई है जिससे प्रदेश के खाद्यान भण्डार में भी बढ़ोतरी हुई है और यह जिला प्रदेश के खाद्यान्न भंडार के रूप में भी जाना जाने लगा है।
1972 मे एक अलग जिला के रूप में अस्तित्व में आने के बाद से ऊना जिला के मेहनतकश किसानों ने पीछे मुडक़र नहीं देखा । प्रदेश सरकार की योजनाओं और खेतीबाड़ी की नई तकनीकें अपनाकर का लाभ उठाकर यहां के किसान साल दर साल अपने खेतों में कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने में लगे है। भरपूर सिंचाई योजनाओं और स्वां तटीयकरण ने भी किसानों के सपनों में नए रंग भरे हैं। जिला के कुल 154925 हैक्टेयर भौगोलिक क्षेत्र में से 40500 हैक्टेयर भूमि कृशि योग्य है जबकि 8165 हैक्टेयर क्षेत्र में वन हैं। जिले में इस समय 2 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा खाद्यान उत्पादन हो रहा
है। 1972 में जिला में 21734 हैक्टेयर क्षेत्र में 25515 मीट्रिक टन गेहूं उत्पादन होता था जो अब बढक़र करीब 70 हजार मीट्रिक टन पहुंच चुका है और 33 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में किसान गेहूं उगा रहे हैं। इसी तरह मक्की उत्पादन 29825 मीट्रिक टन से बढक़र 55 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। सब्जी उत्पादन में भी 5 गुणा इजाफा हुआ है। 1972 में जहां 600 हैक्टेयर क्षेत्र में 4000 मीट्रिक टन सब्जियां पैदा होती थीं वहीं अब सरकार द्वारा बेमौसमी सब्जियों की खेती को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई योजनाओं के सफ ल क्रियान्वयन से जिला ऊना में 1540 हैक्टेयर क्षेत्र में आलू सहित 32 हजार मीट्रिक टन सब्जियां उगाई जा रही हैैं।


कृषि विभाग ने जिले में कृशि में विविधता लाने और जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ कई कार्यक्रम भी शुरू किए हैं। रसायनिक उरर्वकों एवं कृशि रसायनों के अत्याधिक प्रयोग के दृष्प्रभावों को कम करने के लिए जैविक फ सल उत्पादन पर विषेश बल दिया जा रहा है। किसानों को जैविक खेती से जोडऩे के लिए केंचुआ खाद तैयार करने हेतु 50 प्रतिषत अनुदान पर 5 हजार बर्मी किटों का निर्माण करवाया गया है। कृशि विभाग जिला में उच्च कोटी के प्रमाणित बीज उत्पादन में भी कार्यरत है। जिला में इस समय करीब 12 हजार क्विंटल प्रमाणित बीजों का उत्पादन हो रहा है और ये बीज किसानों को उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। अनुसूचित जाति विशेष घटक योजना के तहत किसानों को सभी प्रकार के बीज, कृषि उपकरण व कृषि रसायनिक दवाईयां अनुदान पर उपलब्ध करवाई जा रही हैं।
कृषि में महिलाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने व उनमें व्यवसायिक दक्षता लाने के लिए जिला भर में 75 महिला समूह बनाए गए हैं। इन महिला समूहों को कृशि की परंपरागत तकनीकों के साथ-साथ मधुमक्खी पालन, खुम्ब उत्पादन, फलों व सब्जियों के अन्य खाद्य पदार्थ बनाने की जानकारियां मुहैया करवाई गई हैं। कृशि क्षेत्र में किसानों को तकनीकी जानकारी देने के लिए एक कार्य योजना भी क्रियान्वित की जा रही है। इसके अन्तर्गत किसान प्रषिक्षण, प्रदर्शन प्लाट, फ व्वारा सिंचाई उपकरण लगाने के अतिरिक्त उन्नत बीज अनुदानित दरों पर दिए जा रहे हैें। विभाग द्वारा किसानों के खेतों में प्रदर्शनी प्लाट लगाकर 480 किसानों को लाभान्वित किया गया है । किसान से किसान तक प्रोद्यौगिकी हस्तांतरण करके सैंकेड़ों किसानों को नवीनतम जानकारियों से लैस किया गया है। कृषि विभाग द्वारा जिला में 57 प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से 1500 किसानों और राज्य स्तर पर लगे प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से 100 किसानों को लाभान्वित किया गया है। यही नहीं, जिला के प्रगतिषील किसानों को राज्य से बाहर भी भ्रमण करवाया गया है। जिला मुख्यालय में अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित मृदा परीक्षण प्रयोगशाला भी स्थापित की गई है और किसानों के खेत की मिटटी का निशुल्क परीक्षण किया जा रहा है। इस सेवा को सर्विस गारंटी एक्ट के तहत भी लाया गया है।

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