October 21, 2017

हिमाचल की बेटी ने कोरिया में मचाई धूम, कबड्डी को अपना कैरियर बनाना चाहती है कविता

18 जुलाई धर्मशाला :खेल प्रशिक्षण केन्द्र धर्मशाला की खिलाड़ी कविता ने भारतीय महिला कबड्डी टीम की ओर से कोरिया के चियोन में 27 जून से 3 जुलाई तक आयोजित चैथी एशियन इंडोर एवं मार्शल आर्ट खेलों में भाग लेकर प्रदेश और देश का नाम रोशन किया, जिसमें भारतीय टीम ने स्वर्ण पदक हासिल किया।
कुल्लु जिला के एक छोटे से गांव जगतसुख में एक किसान श्री पृथ्वी सिंह के घर जनवरी, 1993 को जन्मी कुमारी कविता को बचपन से ही खेल एवं साहसिक कार्यों में विशेष रूचि थी। स्थानीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल, जगतसुख में जमा दो की शिक्षा ग्रहण करने के दौरान स्कूल के शारीरिक शिक्षक श्री विजय ठाकुर ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और आगे बढ़ने के लिये उनके प्रेरक बने और कविता ने प्रथम बार वर्ष 2007 से अपने स्कूल से कबड्डी के खिलाड़ी के रूप में भाग लेना आरम्भ कर दिया था और इस दौरान कविता ने दिसम्बर 2007 में दिल्ली में आयोजित 53वीं राष्ट्रीय स्कूल प्रतियोगिता में भाग लेकर कबड्डी में प्रदेश को कांस्य पदक दिलाया।
अप्रैल, 2009 में कविता का भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के खेल प्रशिक्षण केन्द्र, धर्मशाला में चयन किया गया, जहां पर खेल प्रशिक्षक एमएस बर्मा द्वारा कविता की प्रतिभा को और बेहतर ढंग से निखारा। इस दौरान अक्तूबर, 2009 में धर्मशाला में आयोजित 55वीं राष्ट्रीय स्कूल अंडर-19 प्रतियोगिता में कविता ने प्रदेश को स्वर्ण पदक दिलाकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसके उपरान्त अक्तूबर, 2010 में मध्यप्रदेश के ब्रह्मपुर में आयोजित 56वीं राष्ट्रीय स्कूल अंडर-19 प्रतियोगिता में भी हिमाचल को रजत पदक हासिल हुआ। मार्च, 2011 में कर्नाटक के यूदुपि में आयोजित 58वीं सीनियर नेशनल चैंपियनशिप तथा जनवरी, 2013 में कर्नाटक के माण्डया में आयोजित 60वीं सुपर सीनियर नेशनल लीग प्रतियोगिता में भी हिमाचल को कांस्य पदक दिलाने में कविता का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
कबड्डी खेल में लगातार बेहतर प्रदर्शन के फलस्वरूप कविता भारतीय महिला कबड्डी टीम में चयनित हुईं और उन्हें कोरिया के चियोन में आयोजित चैथी एशियन इंडोर एवं मार्शल आर्ट खेलों में भाग लेकर अपने अन्तर्राष्ट्रीय कैरियर को आरम्भ करने का अवसर मिला, जहां पर कविता द्वारा बेहतर प्रदर्शन करके हिमाचल की बेटी ने देश को गौरवान्वित किया।
कविता ने एक भेंट में अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता का आशीर्वाद, स्कूल के डीपी, साई होस्टल के निपुण प्रशिक्षक तथा कठिन परिश्रम को बताया। जिसकी बदौलत इस मुकाम पर दस्तक दे पाई हूं और उसने साई होस्टल के सहायक निदेशिका श्रीमती अमर ज्योति का भी अन्तर्राष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धा तक पहुंचाने का भी आभार व्यक्त किया।

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