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खेल विधेयक : हंगामा है क्यों बरपा!

stadium
धर्मशाला (अरविन्द शर्मा)
हिमाचल में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के पुत्र अनुराग ठाकुर ने अपने पिता के कार्यकाल में सन 2000 में हिमाचल क्रिकेट संघ की बागडोर सम्भाली थी। पुत्र को पिता (प्रदेश के तत्कालीन सीएम) ने हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग की बेश कीमती ज़मीन धर्मशाला में क्रिकेट स्टेडियम बनाने हेतु 1 रुपए की लीज़ पर दी। स्टेडियम बीसीसीआई के करोड़ों रुपए से बना और दुनिया का बेहतरीन स्टेडियम नामजद भी हुआ। इस दौरान हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के नियमों में भारी फेर बदल हुए। लगभग हर तरह की शक्तियां एचपीसीए अध्यक्ष अनुराग को दे दी गईं। जानकार मानते हैं कि वह अब अपने आप में ही एक खेल संस्था हैं। लोग उन्हें बेहद चाहते हैं क्योंकि वह अपने प्रयासों से हिमाचल में विश्व स्तर की क्रिकेट लेकर आए। खेल विशेषज्ञ यह दावे के साथ कहते हैं कि यदि पूरे प्रदेश में मत लिया जाए तो जनता अनुराग को ही क्रिकेट का मुखिया मानेगी। फिर नए खेल विधेयक से विपक्ष क्यों विचलित है? एक पूर्व रणजी खिलाड़ी ने नाम न दर्शाते हुए कहा, अंदर खाते में भाजपा भारत में खेलों में सबसे प्रिय संघ एवं पैसा बनाने वाली कामधेनु क्रिकेट को किसी भी कीमत पर छोडऩा नहीं चाहती। नए कानून के मुताबित सभी जिलों के चुने हुए खेल प्रतिनिधि ही राज्य स्तर पर अपने-अपने खेल संघों के प्रतनिधियों का लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव करेंगे, जिसमें लाईफ टाईम सदस्यों को मताधिकार नहीं होगा ताकि अपने ही चहेतों से कोई भी खेल चीफ संघ को न भर ले। कांग्रेस के प्रवक्ता जितेंद्र कहते हैं कि यदि अनुराग बेहद लोकप्रिय हैं तो इस बिल से घबरा क्यों रहे हैं। लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव प्रेक्षक के सामने चुनाव कोई भी जीते तो संघ उन्हीं के निर्देशन पर ही तो चलेगा। एक अन्य पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी चंद्रशेखर का मानना है की क्रिकेट से जुड़े सभी खिलाडिय़ों को तथा अपने-अपने खेल से सम्बंधित लोगों को खेल स्पर्धा की सेवा करने का मौका मिलना चाहिए। वह कहते हैं कि इस समय प्रदेश के 36 खेल संघों में से 20 पर या तो राजनेता या पहुंच वाले आला सरकारी अधिकारी काबिज़ हैं। यह तो खिलाडिय़ों से बेईमानी हुई। यह प्रथा बंद होनी चाहिए।
उधर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का कहना है कि अगर एचपीसीए सोसाईटी से कंपनी बन गई है तो नए विधेयक के अनुसार सरकार द्वारा उसे स्टेडियम बनाने के लिए दी जमीन वापस ली जाएगी। वह कहते हैं जब भी खेल सुधार हेतु बिल आता है भाजपा विधायकों के दिमाग में क्रिकेट के सिवा कुछ नहीं आता। प्रत्येक खेल संघ में खेल गतिविधियों व वितीय मामलों में पारदर्शिता होनी चाहिए। सरकार चाहती है कि तमाम खेल संघ नियमों के तहत काम करें। इसमें केवल क्रिकेट की बात तो है नहीं। भाजपा विधायक रवि कहते हैं कि सरकार प्रदेश के 42 खेल संघों पर कब्ज़ा चाहती है। कुछ भी हो कांग्रेस-भाजपा की इस लड़ाई ने पिछले दो वर्ष से हिमाचल को आईपीएल मैचों से महरूम तो कर ही दिया है।

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