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स्वरोजगार का पर्याय बन गयी हैं सब्जी मण्डियां, सब्जी मण्डियों से लाभान्बित हो रहे हैं किसान व बागवान

26 जुलाई कुल्लू : कृषि और बागवानी जिला वासियों की आय का मुख्य साधन है । जिला में घर द्वार पर मण्डियों के खुलने से कृषकों व बागवानों को विपणन की विषेश सुविधा प्र्राप्त हो गयी है जिसके चलते अब जिला के बागवानों व कृषकों को अपने उत्पादों के लिए पहले से कम प्रयासों में बेहतर दाम मिल रहें हैं ।
इसका फायदा बड़े किसानों को तो हो ही रहा है लेकिन छोटे किसान इस विपणन सुविधा से विशेष रूप से लाभान्भित हुए हैं छोटे किसानों की सबसे बड़ी समस्या अपने कम उत्पाद को राज्य से बाहर मण्डियोें में न बेच पाने की थी जिससे कृषि व बागवानी उनके लिए अधिक फायदे मन्द सावित नहीं हो रही थी । मण्डियों के खुलने से अब लघु किसान और बागवान सामाजिक व आर्थिक दृष्टि से सुदृड़ होने लगें है ।वर्तमान में जिला कुल्लू में भून्तर, बन्दरोल, बन्जार, लारजी, कुल्लू, पतलीकुहल, चोरीविहाल तथा खेगसू आदि 6 मण्डियों के माध्यम से कृषकों व बागवानों को उनके उत्पादों के लिए विपणन सुविधा उपलब्ध हो रही है इसके अतिरिक्त निकट भविष्य में मनाली के समीप आलू गा्रउंड तथा निरमण्ड में भी मण्डियां आरम्भ हो जाएंगी।
इन मण्डियों में विपणन समिति के अधिकाररियों व कर्मचारियों की देखरेख में व्यापार होने के कारण किसानों व बागवानों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाता है तथा उत्पाद बेचने के उपरान्त उसी समय किसानों व बागवानों को उनके उत्पाद के दाम भी प्राप्त हो जाते हैं । मण्डियों में उलब्ध हो रही सुविधा के परिणाम स्वरूप जिला के किसानों व बागवानों की रूचि कृषि व बागवानी के क्षेत्र में बढ़ी है । वे इस क्षेत्र में नवीनतम तकनीकी को अपना कर उत्पाद को बढाने हेतु भी प्रयासरत हंै । बड़ी मण्डियों में किसानों के लिए निलामी मंच, किसान भवन, व्यापारियों के लिए पैकिंग व ग्रेडिंग शेड, आड़तियों के लिए दुकानें, शौचालय, कैन्टीन, चैकीदार आवास आदि की सुविधाएं उपलब्ध करवायी गयी है ।
ये मण्डिया नवयुवकों के लिए तो जैसे वरदान ही सिद्व हो रही हों नवयुवकों को इन मण्डियों के माध्यम से स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हो रहें है । इससे युवको में न केवल कृषि व बागवानी के लिए आकर्षण बढ़ा अपितु उन्हे रोजगार के अन्य अवसर भी प्राप्त हुए है। नवयुवकों ने स्वरोजगार के उददेश्य से छोटी व बड़ी गाडियां ली हैं तथा ये अब अपने वाहनोें में फसल को मण्डियों तक पहॅंुचाने के अच्छे दाम प्राप्त कर लेते हैं ।मण्डियों के खुलने से युवकों के लिए विपणन से सम्बन्धित कार्य जैसे माल ढुलाई, ग्रेडिंग, पैकिंग आदि कार्य भी आय का साधन वन गये हैं ।
इससे पूर्व विपणन की उचित सुविधा प्राप्त ना होने के कारण कृषकों व बागवानों को अपने उत्पाद विक्रय हेतु राज्य से वाहर दिल्ली, जयपुर ,अमृतसर आदि मण्डियों में जाना पड़ता था । जहां किसानों को अपने उत्पाद का ना तो उचित दाम मिलता था और उनका शोषण भी होता था ।राज्य के वाहर फसल को विक्रय के लिए ले जाने पर किसानों से अनेक प्रकार की बसुलियां ली जाती थीं तथा किसान आड़तियां के जाल में फंसा रहता था ।
मण्डियों के खुलने से महिलाएं भी इस कार्य से जुड़ हैं क्योंकि उन्हे स्थानीय मण्डियों में अपने उत्पादों को बेचने में किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ता है । महिलाएं कृषी व बागवानी के क्षेत्र में अपनी अहम भूमिका निभाने के साथ-साथ आत्म निर्भर व आर्थिक रूप से सुदृड़ भी हो रहीं है।

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