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सेब के चार माह के पौधे ने दिए तीन किलो सेब

1 जुलाई बिलासपुर (प्रविन्द्र ) बागवानी एक ऐसा क्षेत्र है जिसके माध्यम से बागवान अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। पहले किसान कृषि को ही अधिक महत्व देते थे परंतु वर्तमान परिवेश में स्थिति बदल गई है तथा लोगों का बागवानी की तरफ भी रूझान बढ़ने लगा है। बागवानी के कार्य से ही कुछ लोग अच्छी आय अर्जित कर अपने परिवार का अच्छी तरह से भरण-पोषण कर रहे हैं। आजकल लोग घर के आसपास अपनी जमीन पर आम, लीची, पपीता, अनार इत्यादि के पौधों को लगाकर परिवार के लिए फल उत्पादन कर रहे हैं। फल हमारे भोजन का अभिन्न अंग है तथा इनके सेवन से शरीर को मजबूती मिलने के साथ मस्तिष्क भी प्रसन्नचित रहता है। फलों से मनुष्य का शरीर हृष्ट-पुष्ट होता है तथा इस दिशा में बिलासपुर जिला के प्रगतिशील बागवान हरिमन निवासी पनियाल तहसील घुमारवीं ने खूब नाम कमाया है। अपनी कड़ी मेहनत के परिणामस्वरूप हरिमन बागवानी क्षेत्र में विकास की उंचाईयां छू रहे हैं। बिलासपुर में सेब उगाकर हरिमन ने न केवल जिले का नाम रोशन किया है अपितु अन्य फलोत्पादकों के लिए भी एक मिसाल कायम की है। पिछले वर्ष प्रदेश सरकार ने हरिमन को फ्रासं से आयातित सेब की चार किस्मे उपलब्ध करवाई। हरिमन ने फरवरी 2013 में सेब की किस्म गोल्डन सेब के पांच पौधें, अन्ना किस्म के पांच पौधें, सुपरचीफ किस्म के तीन पौधें स्कारलेट किस्म के तीन पौधें लगाए। प्रदेश सरकार द्वारा फ्रांस से आयातीत इन सेब के पौधें को 650 रु0 की दर से प्रत्येक पौधो खरीदा गया तथा बागवानों के लिए 420 रु0 के उपदान सहित 200 रु0 में उपलब्ध करवाया गया। हरिमन ने बताया कि डोरसेट गोल्ड सेब का पौधो 11 फरवरी 2013 को लगाया गया तथा चार माह की अवधि के दौरान इसमें दो सेब लगे जो जून माह के आरंभ में पक गए तथा एक सेब का भार 200 ग्राम निकला। इसी प्रकार सुपरचीफ किस्म के सेब के पौधे में चार माह की अवधि में 13 सेब लगे।
सुपरचीफ किस्म का सेब जिले की जलवायु के अनुकूल उपयुक्त पाया गया तथा चार माह के सब पोधे में 3 किलोग्राम सेब की पैदावार होनी शुरू हो गई। सेब रंग में भी अच्छा दिखता है। हरिमन ने बताया कि इस किस्म को यदि कलम करके और किस्मे बनाई जाए तो बागवान खूब मालामाल हो सकते हैं। हरिमन की वाटिका में सेब के बहुत से पौंधे हैं जिनमें लगभग पांच क्विंटल तक का उत्पादन हुआ है तथा स्थानीय बाजार घुमारवीं में 70 प्रतिकिलो के हिसाब से बिक्री हो रहा है। इनके बागीचे में अनार के पौधं भी लगाए गए हैं तथा अनार के पौधे भी हैं।
अगर हरिमन की जमीन पथरीली न होती तो उनकी जमीन सोना उगलती इसमें कोई संदेह नहीं। हरिमन ने अपने अथक प्रयासों से अपनी पथरीली जमीन को संवारा तथा अनार लगाकर बहुत अच्छी वाटिका तैयार की जो अन्य बागवानों के लिए एक आदर्श है।
हरिमन की वाटिका को देखने के लिए किसान ही नहीं बल्कि दूर-दूर से लोग बागवानी विशेषज्ञ आते हैं। हरिमन के बागीचे में पांच क्विंटल अनार होने की संभावना है। अपने बागीचे के साथ वर्मी कंपोस्ट खाद का यूनिट भी इन्होंने चला रखा है। इसके अलावा सेब की नर्सरी भी लगाई है जिसमें 10 हजार पौधों लगाए गए हैं जो कि दिसंबर माह तक तैयार हो जाएगी।
नर्सरी के तैयार सेब के पौधों को 40 रु0 प्रति पौधें के हिसाब से विक्रय किया जाएगा।
इस वर्ष जिला बिलासपुर में आम की फसल लगभग न के बराबर है। जिले में आम के वृक्षों में आम के फल बहुत कम नजर आ रहे हैं। लेकिन हरिमन की वाटिका में खूब आम लगे हैं तथा इनकी आम की फसल को देखने के लिए दूर-दूर से किसान-बागवान आ रहे हैं।
प्रगतिशील बागवान हरिमन राज्य स्तर पर बागवानी क्षेत्र में कई पुरस्कार भी प्राप्त कर चुके है तथा इन्हें कई दूसरे भ्रमण पर भी ले जाया गया है।

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