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सूखे की चपेट में होंगे कई राज्य

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दिल्ली, 16 अप्रैल – प्रशांत महासागर की सतह पर असामान्य तरीके से बढ़ते तापमान [अल-नीनो प्रभाव] के चलते इस वर्ष मानसून के दौरान भारत में सामान्य से कम बारिश होगी। जून से सितंबर के बीच कुल 896 मिलीमीटर बारिश होने के आसार हैं। अगस्त को छोड़ पूरे मानसून के दौरान इस बार सामान्य से सिर्फ 34 फीसद बारिश होने की संभावना है। यह भविष्यवाणी मंगलवार को मौसम संबंधी सूचना जारी करने वाली देश की पहली निजी कंपनी स्काईमेट ने की है। इंडिया हैबिटेट सेंटर में प्रेसवार्ता में कंपनी के प्रबंध निदेशक जतिन सिंह ने बताया कि मानसून अपने समय पर ही भारत में प्रवेश करेगा, लेकिन शुरू में ही कमजोर होगा। अल-नीनो का प्रभाव 30 फीसद से अधिक पड़ा तो वर्ष 2009 और 2012 में जिस प्रकार देश के उत्तर पश्चिमी व मध्य के राज्यों में अकाल पड़ा था, इस बार भी वैसे ही आसार बनते दिख रहे हैं। कम बारिश होने से सूखा पड़ने के 25 फीसद आसार हैं। उत्तर पश्चिमी भारत के गुजरात, सौराष्ट्र, कच्छ, पंजाब, राजस्थान व हरियाणा तथा पश्चिम मध्य भारत के पूर्व व पश्चिम मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ, मराठवाड़ा, मध्य महाराष्ट्र , कोंकण, गोवा, कर्नाटक के उत्तरी हिस्से तथा तेलंगाना में सामान्य से कमजोर मानसून व्यापक असर दिखाएगा। भारतीय मौसम विभाग के पूर्व महानिदेशक व वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डीआर सिक्का ने बताया कि राहत देने वाली बात यह है कि मानसून लंबे समय तक रहेगा। जून में निर्धारित समय पर मानसून दस्तक देगा।
क्या है ‘अल-नीनो’ व ‘ला-नीना’
अल-नीनो एक गर्म जलधारा है जो प्रशांत महासागर में पेरू तट के सहारे हर 2 से 7 साल बाद बहना प्रारंभ कर देती है। इस दौरान यह समुद्र में गर्मी पैदा करती है, जिससे पेरुवियन सागर का तापमान 3.5 डिग्री सेंटीग्रेड तक बढ़ जाता है। यह दुनिया में तबाही का भीषण दृश्य उपस्थित करती रही है। 25 दिसंबर को क्रिसमस के करीब इसका पता लगने से पेरू के मछुआरों ने इसका नामकरण अल-नीनो किया। इसकी समाप्ति के बाद प्रशांत महासागर के उसी स्थल से ठंडे पानी की धारा प्रवाहित होने लगती है, जिसे ला-नीना कहा जाता है। ला-नीना भी प्रकृति एवं मौसम में बदलाव लाती है।
किस महीने में कितनी बारिश
18जून: 174 मिलीमीटर [68 फीसद]
18जुलाई: 285 मिलीमीटर [59 फीसद]
18अगस्त: 253 मिलीमीटर [70 फीसद]
18सितंबर: 184 मिलीमीटर [59 फीसद]

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