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सीबीआई की आजादी पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

17 जुलाई नई दिल्ली :सीबीआई की स्वायत्तता के मुद्दे पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी. वहीं CBI ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर अपने कामकाज में सरकारी दखल खत्म करने का तरीका सुझाया है.
अपने हलफनामे में CBI ने अकाउंटेबिलिटी कमीशन का विरोध किया. CBI ने यह भी कहा कि डायरेक्टर का कार्य़काल कम से कम तीन साल होना चाहिए और उसका ओहदा सचिव के बराबर हो.

सीबीआई ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जांच एजेंसी को निष्पक्ष बनाने तथा राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त करने को लेकर वह सरकार के सुझावों से व्यापक रूप से सहमत है, लेकिन इसके साथ ही निष्पक्ष एवं गंभीर मामलों में निष्पक्ष निर्णय लेने के लिए सीबीआई को वित्तीय स्वतंत्रता दिए जाने की मांग भी की.

शीर्ष अदालत में दायर एक शपथपत्र में सीबीआई ने कहा है कि वह सीबीआई निदेशक की नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के प्रधान न्यायाधीश की सदस्यता वाली समिति द्वारा किए जाने संबंधी सरकार के सुझाव से सहमत है.

इस सुझाव पर, कि सीबीआई निदेशक के पास भ्रष्टाचार मामलों की जांच का अनुभव होना चाहिए, जांच एजेंसी ने कहा है कि निदेशक के रूप में नियुक्त किए जा रहे व्यक्ति के पास सीबीआई में निगरानी स्तर पर काम करने का अनुभव होना चाहिए.

जांच एजेंसी ने यह भी कहा है कि सीबीआई के निदेशक के लिए प्रस्तावित दो वर्ष का कार्यकल बहुत कम है और इसे कम से कम तीन वर्ष किया जाना चाहिए.

एजेंसी ने अपने कामकाज को प्रभावी और रोजमर्रा के कामकाज में कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के हस्तक्षेप से बचाव के लिए वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार दिए जाने की मांग की है.

न्यायालय ने कहा, ‘सीबीआई निदेशक जो रोजमर्रा के प्रशासनिक एवं वित्तीय मंजूरी के लिए मंत्रालय पर निर्भर हो, वह मौजूदा स्थितियों में स्वतंत्र और निष्पक्ष फैसले नहीं ले सकता.’

शपथ पत्र पर शीर्ष अदालत बुधवार को विचार करेगी.

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