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सिर पर बरसात, लेकिन छत नहीं

पांवटा साहिब — वह पिछली बार के बरसात के बेरहम जख्म नहीं भुला पाए हैं। इस बार बरसात सिर पर है, परंतु उससे पहले ही गांव के लोगों को सिर पर छत के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। बात हो रही है पांवटा उपमंडल के गिरिपार के धंस रहे गांव शमाह के प्रभावित परिवारों की। जानकारी मिली है कि बीते बरसात में विपत्ति के समय ग्रामीणों को सहारा देने वाले तिब्बतियों ने गांववासियों का सामान घरों से बाहर कर स्कूल के हाल में रख दिया है। अब वहां रह रहे करीब डेढ़ दर्जन परिवार फिलहाल पशुओं की तरह एक हाल में रातें काट रहे हैं। ग्रामीणों को यहां से भी किसी भी वक्त जाने को कहा जा सकता है, जिससे उनकी चिंता और ज्यादा बढ़ने लगी है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक शमाह गांव के ग्रामीणों की दिक्कतें एक बार फिर से बढ़ने जा रही है। सरकार द्वारा गांव के लोगों के लिए आशियाने का प्रबंध न किए जाने के फलस्वरूप इस बरसात फिर ग्रामीण दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो चले है। गांव हर वर्ष धंसता चला जा रहा है। घरों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी है तथा ग्रामीण सरकारी सुविधा के अभाव में दहशत में जीने को विवश है। बीते वर्ष मामला मीडिया में आने के उपरांत प्रशासन व सरकार जागी व ग्रामीणों को तिलौरधार में तिब्बती कालोनी में शिफ्ट कर दिया। पशुओं की खातिर ग्रामीण दिन में गांव में जाने लगे व रात को सोने के लिए कालोनी आते। कुछ परिवारों ने निजी किराए पर कमरे ले रखे हैं। अब जबकि एक साल होने को है तथा दूसरी बरसात सिर पर है बावजूद इसके सरकार ने ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए आवास के कोई पुख्ता प्रबंध नहीं किए हैं। ऐसे में कालोनी के लोग भी ग्रामीणों को कब तक रखेंगे उनकी भी अपनी कई समस्याएं हैं। उधर, इस संबंध में शावगा पंचायत के उपप्रधान व शमाह गांव के निवासी मायाराम शर्मा ने बताया कि तिब्ब्ती कालोनी के कमरों से सामान स्कूल के हाल में रखा गया है। वहां से भी कभी भी वह खाली करने को कह सकते हैं। सरकार को ग्रामीणों के लिए जल्द की सुरक्षित आवासीय प्रबंध करने चाहिए।

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