October 21, 2017

सिरमौर में प्रसिद्ध 12 मेलों में होती है औसतन 28 सांस्कृतिक संध्याऐं-उपायुक्त

नाहन -सिरमौर की संस्कृति प्रदेश में ही नहीं अपितु पूरे देश में
सबसे समृद्ध मानी जाती है और यहां पर आयोजित होने वाले प्राचीन मेलों एवं
त्यौहारों में वेशभूषा, पारम्परिक व्यंजन तथा लोक गीतों में जिला की संस्कृति
के साक्षात दर्शन होते है। यह विचार उपायुक्त सिरमौर श्री रितेश चौहान ने आज
यहां व्यक्त करते हुए कहा कि जिला में वर्ष भर मेलों और त्यौहारों का आयोजन
किया जाता है जिसमें लोगों की अगाथ श्रद्धा और आस्था जुड़ी है।
    उपायुक्त ने बताया कि सिरमौर जिला में एक अन्तर्राष्ट्रीय श्री रेणुकाजी
मेला का हर वर्ष नवम्बर मास में आयोजन होता है, एक सप्ताह तक चलने वाले इस
मेले में छः सांस्कृतिक संध्याओं का आयोजन होता है जिसमें फिल्म जगत के
अतिरिक्त विभिन्न राज्यों, प्रदेश व जिला के असंख्य कलाकरों को अपनी प्रतिभा
दिखाने का अवसर प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त सिरमौर जिला में चार जिला
स्तरीय मेलों का आयोजन होता है जिसमें बैशाखी मेला राजगढ़, वावन द्वादशी मेला
सरांहा, बाल मेला बागथन, एकादशी मेला देवठी मझगांव शामिल है जिनमें औसतन प्रति
मेले में दो और तीन सांस्कृतिक संध्याऐं आयोजित होतीं है जिसमें अधिकतर जिला व
प्रदेश के प्रसिद्ध लोक कलाकार भाग लेते है।
    उन्होने बताया कि जिला में कुछ अनेक ऐसे प्रसिद्ध मेले है जिसमें प्रशासन
अथवा स्थानीय मेला समितियों द्वारा मेलों का आयोजन किया जाता है। इन मेलों में
शरद यमुना महोत्सव  और होला मौहल्ला मेला पांवटा साहिब में आयोजित होता है।
इसके अतिरिक्त गांधी जयन्ती मेला कफोटा, माता भंगयाणी मेला हरिपुरधार, गैलियों
मेला नौहराधार, बिशू मेला अंधेरी, बोगधार मेला इत्यादि पारम्परिक मेले है
जिनमें सांस्कृतिक गतिविधियों के अतिरिक्त खेलकूद गतिविधियों का भी आयोजन किया
जाता है और जिनमें सैंकडो की तादात में लोग भाग लेते है।
    उपायुक्त ने कहा कि सिरमौर जिला के प्रसिद्ध 12 मेलों में लगभग 28
सांस्कृतिक संध्याओं का वर्ष में आयोजन होता है जोकि सिरमौर की संस्कृति के
संरक्षण में काफी सार्थक सिद्ध हो रही है। उन्होने कहा कि यदि कोई संस्था
सिरमौर उत्सव करवाने की इच्छुक है तो वह निःसंदेह आगे आए जिनको प्रशासन द्वारा
यथासंभव सहयोग दिया जाएगा। उन्होने नाहन शहर के सभी नागरिकों एवं सांस्कृतिक
गतिविधियों से जुड़ी संस्थाओं से अपील की है कि सिरमौर उत्सव को अनावश्यक
मुदद्ा न बनाऐं, क्योंकि जिला में वर्ष भर सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन
होता है और सिरमौर के लिए यह बहुत गौरव की बात है कि यहां पर अन्तर्राष्ट्रीय
स्तर का श्री रेणुकाजी मेले का आयोजन किया जाता है जबकि प्रदेश के पांच जिलों
बिलासुपर, ऊना, सोलन, किन्नौर तथा लाहौल-स्पिति में कोई भी अन्तर्राष्ट्रीय
स्तर के मेले को आयोजन नहीं होता है।
    उन्होने बताया कि सिरमौर जिला के लिए यह भी गौरव की बात है कि जिला के
चुढेश्वर कला मंच जालग तथा बाऊनल के सांस्कृतिक दल ने सिरमौर की संस्कृति को
देश में ही नहीं अपितु विदेशो मे कार्यक्रम प्रस्तुत करने के अवसर मिले है
जिससे सिरमौर की संस्कृति का व्यापक प्रचार प्रसार हुआ है।

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