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सतलुज किनारे सुरंग बनाना खतरनाक

19d5-1-300x225शिमला— विशेषज्ञ एजेंसियों द्वारा तैयार सतलुज बेसिन की अध्ययन रिपोर्ट में साफ किया गया है कि यहां पर सुरंग निर्माण नहीं  होना चाहिए। सतलुज प्रदेश की सबसे बड़ी नदी है, जिस पर कई बड़े प्रोजेक्ट लग चुके हैं। आने वाले समय के लिए भी यहां पर परियोजनाओं की संभावनाएं देखी जा रही हैं, लेकिन इस बेसिन की अध्ययन रिपोर्ट में कई तरह के मामले उठाए गए हैं। इसमें से एक सुरंगों का निर्माण है, जिससे यहां के पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। इसका सबसे बड़ा असर यहां प्राकृतिक जल स्त्रोतों पर रहेगा, जो कि पहले से दिखाई भी दे रहा है। नाथपा झाखड़ी में अध्ययन के दौरान पाया गया है कि वहां पर प्राकृतिक चश्मे समाप्त हो चुके हैं। ऐसे में नई परियोजनाओं के लिए यहां सुरंगों का निर्माण होता है तो जल संसाधन के लिए घातक होगा। रिपोर्ट से पहले यहां लूहरी जल विद्युत परियोजना के निर्माण में सुरंगों की संख्या को कम करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। सतलुज जल विद्युत निगम द्वारा प्रस्तावित लूहरी परियोजना में पहले तीन टनल बनाने का विचार था, जिसे बाद में मना कर दिया गया। अब सिंगल टनल ही यहां पर बनानी प्रस्तावित है। ऊर्जा निदेशालय द्वारा तैयार करवाई गई अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि इस पूरे बेसिन में चट्टानें समरूप नहीं हैं। इनका घनत्व अलग-अलग है। सुरंग निर्माण से यहां प्राकृतिक तौर पर जल संसाधन का रुख मोड़ सकते हैं, जो कि प्रकृति से छेड़छाड़ है। इससे वनस्पति पर भी विपरीत असर बताया गया है जिसके लिए विशेष कार्ययोजना अपनाने पर बल दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां-जहां भी भू-अधिग्रहण किया जाए, वहां पर हरित पट्टी के विकास के लिए पहले से कदम उठाए जाएं।

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