October 21, 2017

श्री राम स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने बनाई अपनी पहचान

17 जुलाई सिरमौर :हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध धार्मिक व ऐेतिहासिक नगरी पांवटा साहिब के देवीनगर (वार्ड न0-10) की महिलाओं ने समेकित बाल विकास परियोजना के माध्यम से श्रीराम स्वयं सहायता समूह बनाकर सामाजिक व आर्थिक दृष्टि से अपनी एक अलग पहचान बनाई है। समूह की इन महिलाओं ने जहाॅं अपना व्यवसाय शुरु किया तो वहीं पारम्परिक खेतीबाड़ी के साथ-साथ पशुपालन को भी अपनाया है।
स्थानीय बाल विकास परियोजना की पर्यवेक्षिका व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के सहयोग से सितम्बर, 2007 में श्रीराम स्वयं सहायता समूह का गठन किया गया। इस समूह में 12 महिलाएं शामिल हुई। जिसमें 05 अनुसूचित जाति, 04 अल्पसंख्यक वर्ग व 03 अन्य सामान्य परिवारों से संबंधित है। इस समूह की महिलाओं ने हि0प्र0 राज्य सहकारी बैंक की शाखा पांवटा साहिब में अपना खाता खोला तथा अब तक लगभग एक लाख रुपये से अधिक की बचत राशि जमा कर ली है। यही नहीं इस समूह की महिलाओं ने पर्यवेक्षिका व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के सहयोग से पहली बार वर्ष 2008 में 1,10,000 रुपये, दूसरी बार वर्ष 2010 में 88,000 रुपये व तीसरी बार वर्ष 2011 में 4,20,000 रुपये का ऋण बैंक से लिया है। इस ऋण से समूह की सदस्य श्रीमति सावित्री दास पाण्ड़े ने कपड़े की दुकान, श्रीमति साहिना बेगम व मीना बेगम ने सिलाई, श्रीमति गुरदेवी ने जूते, बबली ने जूस व सब्जी, श्रीमति वन्दना ने सिलाई की दुकान खोली है, जबकि 06 अन्य सदस्यों ने दो से तीन गाय खरीदी है। जिससे समूह की यह महिलाएं जहां दुकान से आय अर्जित कर रही है तो वहीं दूध, घी, पनीर इत्यादि बेचकर अपनी आमदन को बढ़ा रही है। इन महिलाओं की कड़ी मेहनत व अपने पैरों पर खड़े होने की चाह ने अपने कार्य शुरु करने के लिए बैंक से अब तक लिए 6,18,000 रुपये के ऋण में से लगभग 4,00,000 रुपये को वापिस भी कर दिया है। समूह से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि इससे पहले जहाॅं उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर थी तो वहीं आमदन का कोई भी स्थायी साधन नहीं था। परन्तु अब वह प्रतिमाह लोन की किस्त अदायगी के साथ-साथ लगभग दो से तीन हजार रुपये से भी अधिक की बचत कर रही है।
इस संबंध में समूह की सचिव वन्दना का कहना है कि स्वयं सहायता समूह के माध्यम से जहां महिलांए आर्थिक तौर से मजबूत होकर आत्मनिर्भर बन रही है तो वहीं उनमें स्वावलंबन का भी एहसास हो रहा है। उनका कहना है कि समूह की महिलाएं स्वयं ही बैंक जाकर जमा राशि, ऋण इत्यादि के कार्य को करती है, बल्कि आर्थिक तौर पर मजबूती के चलते अब अन्य गरीब महिलाओं की मदद भी करती है तथा अन्य सामाजिक कार्यों में भी बढ़चढ़ कर भाग लेती है। इसी तरह समूह की अध्यक्षा संतोष देवी का भी कहना है कि समूह से पहले उन्हे बाजार से उंची दरों पर लोन लेना पडता था। जिससे न केवल उन्हे ज्यादा आर्थिक बोझ सहना पडता था बल्कि वह आर्थिक तौर पर असुरक्षित भी महसूस करती थी। परन्तु जब से उन्होने समूह बनाया है तबसे न केवल उनकी बचत राशि में वृद्धि हो रही है बल्कि बैंक से लिया गया ऋण भी उन्हे कम ब्याज दर पर मिलता है तथा ऋण अदायगी का बोझ भी उनपर नहीं रहता है। साथ ही कहना है कि वह अपने आसपास की महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूह के फायदे भी बताती रहती हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं इस ओर आकर्षित हो सके।
इस तरह श्रीराम स्वयं सहायता समूह की इन महिलाओं ने कड़ी मेहनत व जिन्दगी में कुछ करने के जज्बे के साथ आत्मनिर्भर बनकर समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

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