Header ad
Header ad
Header ad

शोसन के प्रगतिशील बागवान नानक चंद का बगीचा लीची से हुआ गुलजार

4 जुलाई बिलासपुर : गर हौंसले हों बुलंद तो कुछ भी असम्भव नहीं। इसे चरितार्थ कर दिखाया है जिला बिलासपुर के उप तहसील नम्होल के छोटे से गांव शोसन के प्रगतिशील बागवान नानक चन्द ने। प्रगतिशील बागवान नानक चन्द ने अथक प्रयासों से निजी भूमि पर बड़े स्तर पर अनार, लीची व सेब का उत्पादन करने में सफलता हासिल की है। श्री नानक चन्द के अनुसार उनकी शुरू से ही पशु पालन व खेती-बाड़ी में रूचि रही है और खेती-बाड़ी के साथ-साथ उन्होंने सन् 2000 में देहरादून किस्म की लीची के 10 पौधे अपनी जमीन में लगाए और परिणाम अच्छा होने पर 40 पौधे और लगाए गए ।
उनके मुताबिक वेैसे तो लीची की फसल हर साल आती है लेकिन बम्पर फसल सात आठ सालों में एक बार ही आती है और इस साल बम्पर फसल होने के कारण एक पौधे में 35-40 किलो के हिसाब से लगभग 60-70 हजार रू0 लीची से आमदनी होने की उम्मीद है। उन्होंने अपनी जमीन में लीची के पौधों के अलावा अनार, सेब व आम के पौधे भी लगा रखे हैं। फलों से लदे हुए ये फलदार पौधे देखने वाले को बरवस ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं। अनार में मृदुला, कन्धारी तथा भगवां उम्दा किस्मों के पौधे लगाए हेैं जिनसे आने वाले समय में नानक चंद को अच्छी आमदन होने की आशा है। लीची और अनार के सेवन से हमारे शरीर को विभिन्न प्रकार के खनिज पदार्थ तथा विटामिन प्राप्त होती है और शरीर में उत्पन्न होने वाले विभिन्न रोगों जैसे कैंसर, उच्च रक्तचाप का बढ़ना, दिल की बिमारियां, त्वचा की खराबी, हडडी के रोग तथा पीलिया जैसी बिमारियों से निजात मिलती है ।
श्री नानक चन्द के मुताबिक गर्मियों के दिनों में लीची के पौधों को बहुत अधिक पानी की आवष्यकता होती है । भारत के इतिहास में लीची व अनार कई संस्कृतियों व धर्मों के लेखन तथा कलाकृतियों में पाये जाने वाले सबसे पुराने फल हेै । यह फल भारत के उंचाई वाले क्षेत्रों में अधिक पाए जाते हैं । लीची व अनार में अनेक प्रकार की किस्में पाई जाती है। जिला बिलासपुर के विभिन्न क्षेत्रों में बागवानों द्वारा लीची व अनार के फलों का उत्पादन किया जाता है। इन फलोें का उत्पादन जिले के निचले क्षेत्रों की अपेक्षा ऊपरी क्षेत्रों जुखाला, नम्होल, दयोथ तथा टेपरा में बड़े पैमाने पर किया जाता है।


जिले में बागवानों द्वारा जलवायु के हिसाब से विभिन्न किस्मों के पौधे रोपित कर सेबों का उत्पादन किया जा रहा है । बागवान बड़े पैमाने पर सेब उत्पादन कर खुले बाजार में अच्छी कीमत पर बेचकर अपनी आजीविका कमा रहे है। सेब उत्पादन से अधिक फायदा होने की वजह से क्षेत्र के अन्य बागवान भी धीरे-धीरे सेब उत्पादन की ओर रूख करने लगे हैं। वे भी विभाग के माध्यम से अच्छी किस्म के सेब के पौधे अपनी जमीन में रोपित कर रहे हैं। जिला बिलासपुर के पनयाला गांव के निवासी हरिमन ने सबसे पहले क्षेत्र में सेब उत्पादन कर सबको हैरत में डाल दिया उसके बाद धीरे-धीरे क्षेत्र के अन्य बागवानों ने भी उनसे प्रेरणा लेकर सेब उत्पादन आरम्भ कर दिया है ।
श्री नानक चन्द ने बताया कि उन्होंने पौधों के लिए गडडे करने तथा पौधों के तौलिये बनाने के लिए 100 हाॅरस पावर का हस्त चलित पावर टिल्लर भी खरीद रखा है जिसके लिए उद्यान विभाग द्वारा उपदान भी दिया गया है। उनके मुताविक यह हस्त चलित छोटा पावर टिल्लर ढलानदार खेतों के लिए वहुत ही सहायक सिद्ध हो रहा है। इस परिक्षेत्र में बीस-पच्चीस बागवान ऐसे है जोे पशु पालन व खेती-बाड़ी के साथ-साथ बागवानी से भी जुडे हुए हंै। उद्यान विभाग द्वारा नानक चंद को अनार के छोटे पौधे रोपित करने व तौलिये तैयार करने के लिए साढ़े बाईस हजार रू0 की राषि अनुदान के रूप में दी गई है ।
उद्यान विभाग क्षेत्र के समस्त बागवानों को समय-समय पर बाहरी प्रदेशों के भ्रमण के लिए ले जाता हैै और बाहरी प्रदेशों में लगे लीची, अनार, आम, आड़ू तथा सेब की बम्पर पैदाबार के लिए विभिन्न प्रकार की तकनीकों से अवगत करवाता है ताकि जिला बिलासपुर के बागवान अपने क्षेत्र में फलोत्पादन को बढ़ाकर अपनी आर्थिक स्थिति को ओैर सुदृढ़ कर सकें। इतना ही नहीं विभाग द्वारा समय-समय पर क्षेत्र में बागवानों के लिए सेमीनारों का आयोजन कर उन्हें जहां पौधों की जड़, तना, पत्तों में होन वाली बिमारियों तथा उनकी रोकथाम की नवीनतम तकनीकी जानकारी उपलब्ध करवाई जाती है वहीं फलोत्पादन में बढ़ौतरी बारे भी समय-समय पर किए जाने वाले कीटनाशक छिड़काव की भी विस्तार से जानकारी दी जाती है। इस प्रकार विभाग के सहयोग तथा बागवानों के जबरदस्त प्रयासो से जिला बिलासपुर फल जिला बनने की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है।

Share

About The Author

Related posts

Leave a Reply

 Click this button or press Ctrl+G to toggle between multilang and English

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Please Solve it * *