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शिमला शहर के लिए पब्बर नदी परियोजना बेहतर

शिमला, 02 जून – श्रीमती विद्या स्टोक्स सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य श्रीमती विद्या स्टोक्स ने कहा कि प्रदेश सरकार शिमला शहर के लोगों को निर्बाध पेयजल उपलब्ध करवाने के प्रति वचनबद्ध है और सम्बन्धित विभाग इस दिशा में आपसी समन्वय से कार्य कर रहे हैं ताकि पेयजल का सही वितरण सुनिश्चित बनाया जा सके। श्रीमती स्टोक्स आज यहां सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में बोल रहीं थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 में शिमला शहर के लिए पब्बर नदी से पेयजल आपूर्ति की ग्रेविटी योजना के प्रस्ताव को तैयार किया गया था, जिसे वर्ष 2009 में वित्त पोषण के लिए विश्व बैंक को भेजा गया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा भारत सरकार के स्वतंत्र परामर्शदाता ‘वापकोस’ की सहायता से इस परियोजना की तकनीकी रिपोर्ट तैयार की गई। प्रदेश सरकार ने इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर भारत सरकार को प्रेषित किया। उन्होंने कहा कि यह कहना गलत है कि तकनीकी विश्ेाषज्ञ द्वारा पब्बर परियोजना को अव्यावहारिक घोषित किया है। सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जहां तक वित्तीय व्यावहारिकता का सवाल है तो सतलुज परियोजना के कार्य पर 100 करोड़ रुपये प्रति वर्ष की दर से 30 वर्ष के कार्यकाल में विद्युत खर्च पर 3000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च आएगा। यह शुल्क प्रदेश सरकार द्वारा वहन करना होगा। उन्होंने कहा कि लागत राशि के 800 करोड़ रुपये के अन्तर को आठ वर्षों में पूरा कर लिया जाएगा। इस प्रकार सतलुज परियोजना की तुलना में पब्बर प्रस्ताव वित्तीय दृष्टि से व्यावहारिक है। उन्होंने कहा कि पब्बर परियोजना के माध्यम से वर्ष 2037 तक राजधानी शिमला की पेयजल की आवश्यकता को पूरा किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार द्वारा पब्बर नदी परियोजना के प्रस्ताव को प्रस्तुत किया था, परन्तु इससे आरम्भ करने में असफल रही। इसीलिए, अब इस परियोजना को अव्यावहारिक बताकर सतलुज नदी से पेयजल उठाने पर जोर दे रही है, जो बहुत खर्चीला है। वर्तमान सरकार इस दिशा में गंभीरतापूर्वक कार्य कर रही है ताकि शिमला शहर के लोगों को पर्याप्त मात्रा में पेयजल उपलब्ध हो सके। श्रीमती स्टोक्स ने कहा कि शिमला शहर के लिए सभी स्रोतों से पेयजल की क्षमता 60 एमएलडी है और इन स्त्रोतों से औसतन 45 एमएलडी जल की आपूर्ति की जा रही है और शिमला शहर में 20 से 40 एमएलडी की भंडारण क्षमता है तथा निर्धारित नियमों के अनुसार प्रति व्यक्ति पेयजल आपूर्ति की 135 लीटर है और 2.50 लाख जनसंख्या को 33.75 एमएलडी पानी बनता है। उन्होंने कहा कि विद्युत बाधित होना, पेयजल वितरण के दौरान औसतन 26.60 प्रतिशत वितरण हानि तथा नगर निगम शिमला के पास कम भण्डारण क्षमता के दृष्टिगत पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने के मुख्य कारण हैं, जबकि पानी की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी संबद्ध विभागोें को इस दिशा में आपसी तालमेल से कार्य करने के उचित निर्देश दिए गए हैं ताकि लोगों को समुचित मात्रा में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित बनाई जा सके।

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