October 21, 2017

लाभकारी योजनाएं बन रही है कृषकों की आत्मनिर्भरता का आधार

3 जुलाई, कुल्लू :युवा कृषि को स्वरोज्गार के रूप में अपनाकर आत्मनिर्भर हो रहे हैं। आत्मनिर्भरता के इस सफर में कृषि विभाग के माध्यम से आरम्भ कल्याणकारी योजनाएॅं व कार्यक्रम महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। जिला में कुल 5503 वर्ग कि0मी0 क्षेत्र में से कुल 36224 हैक्टेयर क्षेत्र में कृषि की जाती है तथा मुख्यतः गेहूं, मक्का, सब्जियां व दालें आदि फसलें उगाई जाती हैं।वैमोसमी सब्जियां जैसे मटर बन्दगोभी, फूलगोभी, टमाटर व विदेशी सब्जियां जैसे ब्राॅकली, लाल बन्दगोभी, एसपैरागस, पार्सले, लीक आदि नगदी फसलें जिला से बाहर अन्य जिलों तथा राज्यों की जरूरतों को पूरा करती हैं तथा कृषकों की आय का साधन भी है। जिला में लगभग 50823 युवा कृषक हैं जो कृषि को स्वरोजगर के रूप में अपनाकर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है।
कृषकों की कृषि सम्बन्धी समास्याओं के समाधान के लिए 27 केन्द्र स्थापित किये गये हैं तथा शिविरों को आयोजन किया जा रहा है जहाॅं विशेषज्ञों द्वारा उन्हे कृषि सम्बन्धी जानकारियां उपलब्ध करवाई जाती है तथा समस्याओं को समाधान भी किया जाता है।कृषकों के लिए विभाग द्वारा 43 तकनीकी फिल्ड स्टाफ रखा गया है। कृषि में महिलाओं के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। महिलाएं भी कृषि क्षेत्र में जुड़कर आत्मनिर्भर हुई हैं महिलाओं के लिए अनेकों ऐसे कार्यक्रम आरम्भ किये गये है जो उन्हे प्रोत्साहित कर रहे हैं और उनके आत्मविश्वास को बढ़ावा दे रहे हैं विभाग द्वारा महिलाओं के लिए कृषि महिला समूह बनाना, महिला गोष्ठी व भ्रमण आदि कार्यक्रम शामिल हैं।
कृषि को व्याप्क रूप से रोजगार के रूप में अपना कर आम आदमी लाभान्बित हो सके इसके लिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं जिसके तहत सुधरे बीज, पौध संरक्षण दवाईयां, उन्नत कृषि औजार आदि पर अनुदान दिया जा रहा है तथा प्रशिक्षण शिविरों, कृषक अध्ययन भ्रमण का आयोजन करके इन वर्गों के कृषकों को लाभान्बित किया जा रहा है तथा पोली हाउस, लघु सिंचाई योजना आदि सुविधाएं भी प्रदान की जा रही है।
किसान बागवान समृद्धि योजना-1 के तहत पाॅली हाउसों के निर्माण, फाॅगर व ड्रिप पर 85प्रतिशत तथा सिंचाई हेतु टैंकों के निर्माण एवं पम्पिंग मश्ीानरी आदि पर 50प्रतिशत उपदान दिया जा रहा है। जबकि किसान बागवान समृद्धि-2 के तहत स्प्रिंकलर सिंचाई योजना पर 80 प्रतिशत व सिंचाई के लिए टैंको, कुओं एवं पम्पिंग मशिनरी आदि पर 50 प्रतिशत उपदान दिया जाता है।
पाॅली हाउसों का बीमा करवाने के लिए कृषि विभाग ने नेशनल इन्शयोरेन्स कम्पनी को अधिकृत किया है और 110रू0 प्रति लाख की दर से प्रीमीयम राशि लेकर पाॅली हाउसों का बीमा किया जा रह है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के तहत मक्की, गेहूं, धान, जौ, आलू और अदरक की फसलों को लाया गया है।
गेहूं की पैदावार को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अभियान आरम्भ किया गया है। जिसके तहत प्रदशर्न खेत कार्यक्रमों का आयोजन, गेहूं के बीज, दवाईयों तथा मशीनरी पर आनुदान दे और गेहूं के सुधरे बीज कृषकों के खेतों में उत्पन करके कृषकों को लाभान्वित किया जा रहा है।
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत हर प्रकार के कृषि सम्बन्धी बीजों का 100प्रतिशत वीजोपचार करने, जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए वर्मी पिटों/ वर्मी बेड्स के निर्माण पर 35 सौ रू0 व 4हजार रू0 अनुदान दिया जा रहा है।इसके अतिरिक्त हस्तचलित यन्त्रों, बायोगैस प्लाॅट बनाने हेतु उपदान देकर कृषकों को लाभान्वित किया जा रहा है।बेहतर पैदावार के लिए मिट्टि का स्वस्थ व फसल के अनुसार होना आवश्यक है जिसके लिए जिला में स्थापित मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में निःशुल्क जाॅंच की जा रही है।

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