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रेशम कीट पालन बना बेला के लोगों के लिए स्वरोजगार का साधन

हमीरपुर, 31 जुलाई: कुछ कर दिखाने का जज्बा हो तो मुश्किल राहें भी आसान हो जाती हैं, गरीबी में जीवन-यापन कर रही की हुनरमंद महिला रमा देवी के प्रयास और जज्बा अब रंग दिखाने लगा है। रमा देवी ने रेशम कीट पालन व्यवसाय शुरू कर अपने परिवार को आर्थिक तंगी से निजात दिला दी है। रमा देवी को सरकार की तरफ से रेशम कीट पालन व्यवसाय शुरू करने के लिये रेशम कीट तथा शेड निर्माण के लिए आर्थिक मदद प्रदान की गई है। सरकार के उपदान का सही उपयोग करते हुए रमा देवी काकून की एक फसल का दस हजार रूपये से ज्यादा आमदनी कमा रही है। रमा देवी के इन प्रयासों को देखकर नादौन उपमण्डल की अन्य महिलाएं भी रेशम कीट पालन के व्यवसाय से जुडऩे में खासी दिलचस्पी दिखा रही है।
सरकार द्वारा रेशम कीट पालन को बढ़ावा देने के लिये उत्प्रेरित विकास योजना शुरू की है। इस योजना के तहत रेशम कीट पालन व्यवसाय से जुडऩे वाले किसानों और महिलाओं को पच्चास फीसदी सब्सिडी प्रदान की जा रही है।
नादौन उपमंडल की बेला पंचायत की रमा देवी ने बताया कि उसका परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा था, उस के पति की मृत्यु होने के पश्चात घर की रोजी रोटी तथा बच्चों की पढ़ाई का खर्चा चलाना भी मुश्किल हो गया था, घर का खर्च चलाने के लिए रमा देवी ने बांस की टोकरियां इत्यादि बनाने का काम आरंभ किया गया इसके साथ ही रेशम कीट पालन के लिए रेशम पालन विभाग से सब्सिडी पर रेशम कीट उपलब्ध करवाया गया इसके अतिरिक्त रेशम कीट पालन के लिए शेड बनाने को भी 75 हजार की राशि स्वीकृत की गई है।
रमा देवी ने बताया कि अब वह काकून उत्पादन से एक सीजन में दस हजार के करीब आय अर्जित कर रही है, इससे परिवार की रोजी-रोटअी चलाने में काफी मदद मिल रही है, उधर बेला के ही धर्म चंद का कहना है कि रेशम कीट पालन के लिये सरकार से मिल रही मदद के कारण ही वह स्वरोजग़ार शुरू करने में कामयाब हुआ है। धर्म चंद ने शहतूत की नर्सरी भी तैयार कर ली है, धर्म चंद का कहना है कि काकून उत्पादन से एक साल में बीस से पच्चीस हजार की तक की आमदनी हो रही है इससे परिवार का खर्चा चलाने में भी काफी मदद मिल रही है।
उपायुक्त हमीरपुर श्री आशीष सिंहमार का कहना है कि सरकार द्वारा स्वरोजग़ार शुरू करने के लिये चलाई जा रही योजनाओं को पात्र लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रेशम कीट उत्पादन के लिये उत्प्रेरित विकास योजना शुरू की गई है, जिसके तहत किसानों को सब्सिडी प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही काकून के विपणन के लिये समय-समय पर रेशम कीट केन्द्रों पर मेलों का आयोजन किया जाता है।

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