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रेतीली भूमि में सब्जियों की बहार, सब्जी उत्पादन में नाम कमा रहा ऊना जिला

5 जुलाई ऊना :स्वां नदी के तट पर रेतीली भूमि में आजकल सब्जियों की बहार आई हुई है। जिस स्वां नदी को अब तक दुःखों की नदी के रूप में जाना जाता रहा है, उस में सब्जियों को लहलहाते देखना एक अजूबा ही कहा जा सकता है लेकिन अप्रवासी राई परिवारों ने इस अजूबे की बदौलत ऊना जिला को सब्जियों की पैदावार में अग्रणी तो बनाया ही है, साथ ही अपनी आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ की है। इन दिनों ऊना जिला में स्वां नदी के किनारे सड़क पर कई जगह राई परिवारों को बेमौसमी सब्जियां बेचते देखा जा सकता है।
बेमौसमी सब्जियों की खेती के लिए ऊना जिला की जलवाऊ वैसे भी माकूल है। जिला का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 1,54,925 हैक्टेयर है जिसमें से 76 हजार हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र कृषि के अन्तर्गत है और जिला में करीब 2 लाख मीट्रिक टन खाद्यान उत्पादन हो रहा है। जिला में करीब 1200 हैक्टेयर भूमि में 25 हजार मीट्रिक टन सब्जियां उगाई जा रही हैं। पिछले कुछ वर्षाें से जिला में सब्जी उत्पादन लगातार नई छंलाग लगा रहा है। जिला में हरित गृहों के माध्यम से अनेक किसानों ने बेमौसमी सब्जियां उगा कर अपनी आर्थिकी का नए आयाम दिए हैं। हरित गृहों में उत्पादित बेमौसमी सब्जियों की बाजार में खासी मांग रहती है और किसानें को बेहतर दाम मिल जाते हैं।
स्वां नदी के तट पर स्वदेशी तकनीक के ज्ञान से बेमौसमी सब्जी उत्पादन ने इस जिला को एक नई पहचान तो दी ही है, साथ ही यह साबित कर दिखाया है कि तकनीकी ज्ञान, लम्बे अनुभव व मानव श्रम से प्रतिकूल परिस्थितियों को भी अनुकूल बनाया जा सकता है। ऊना जिला की स्वां नदी वर्षा ऋतु में अभिशाप के रूप में जानी जाती रही है। इस नदी में करीब 74 छोटी-छोटी बरसाती खड्डें आकर मिलती हैं। जिले के कुल क्षेत्रफल 1542 किलोमीटर में से 1204 वर्ग किलोमीटर स्वां नदी के जलागम क्षेत्र में है। स्वां नदी में इस क्षेत्र का अधिकतर पानी इक्ट्ठा होकर बहता है तथा यह पानी अपने साथ हजारों टन मिट्टी व रेत बहा कर लाता है। यह मिट्टी व रेत मैदानी तटीय क्षेत्रों में जमा हो जाती है और वहां की भूमि को रेतीला बना देती है। लेकिन इस रेतीली मिट्टी में सब्जी उत्पादन जैसा श्रमसाध्य कार्य करके अप्रवासी राई परिवारों ने जिले में सब्जी उत्पादन को नए आयाम दे दिए हैं।

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