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रिरांगक में बनेगा हिमाचल का पहला सैन्य हवाई अड्डा

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कुल्लू — हिमाचल का पहला सैन्य हवाई अड्डा मिलने की उम्मीदों को नए पंख लगते नजर आ रहे हैं। रक्षा मंत्रालय के निर्देश पर भारतीय सेना स्पीति घाटी के रांगरिक में हवाई पट्टी की नए सिरे से संभावनाएं तलाशने के लिए सर्वेक्षण शुरू करने जा रही है। सूत्रों की मानें तो लद्दाख के चुमार क्षेत्र में तीन हजार करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले सुखोई बेसड नयोमो सैन्य हवाई अड्डे का निर्माण पूरा होते ही रक्षा मंत्रालय की अगली प्राथमिकता स्पीति घाटी के रांगरिक में हवाई पट्टी बिछाने की है। रक्षा मंत्रालय ने सीमा सड़क संगठन से भी रांगरिक में हवाई पट्टी की फिजिबिलिटी रिपोर्ट मांगी है। जनजातीय आयोग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं लाहुल स्पीति के विधायक रवि ठाकुर की मानें तो रक्षा मंत्रालय से उन्हें मिली सूचना के मुताबिक सेना के एक्सपर्ट्स सर्वेक्षण के लिए जल्द ही रांगरिक का रुख करने जा रहे हैं। हालांकि पूर्व में एयरपोर्ट अथारिटी ने अपनी फिजिबिलिटी रिपोर्ट के आधार पर रांगरिक में हवाई पट्टी बिछाने से हाथ पीछे खींच लिए थे, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्र में बुनियादी सामरिक ढांचे की मजबूती के लिए रांगरिक में सैन्य हवाई अड्डा बनाने का यही सही समय है। लद्दाख क्षेत्र में पांच सैन्य हवाई अड्डों लेह, कारगिल, थोएस, सियाचिन ग्लेशियर के समीप तथा नयोमो (निर्माण के  अंतिम चरण) से वहां सामरिक तैयारियों को रफ्तार मिली है, जबकि हिमाचल में बार्डर एरिया को अभी तक एक भी सैन्य हवाई अड्डा नहीं मिल पाया है। 10वें वित्तायोग में रांगरिक में हवाई पट्टी बिछाने के लिए भारत सरकार ने 30 करोड़ रुपए की राशि जारी की थी, लेकिन एयरपोर्ट अथारिटी से ग्रीन सिग्नल न मिल पाने के चलते यह बजट अन्यत्र शिफ्ट करना पड़ा था। लाहुल स्पीति के विधायक रवि ठाकुर ने बताया कि रक्षा मंत्रालय के निर्देश पर भारतीय सेना रांगरिक में हवाई पट्टी की संभावनाएं तलाशते हुए नए सिरे से फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करेगी। सीमा सड़क संगठन के डायरेक्टर जनरल से भी इसको लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं।

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