October 22, 2017

राजस्थान नहीं माना तो अदालत जाएंगे

29d5-1शिमला  — पौंग विस्थापितों के लंबित मामले को सुलझाने के लिए उच्च स्तरीय टीम जनवरी के पहले हफ्ते में राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में राजस्थान जाएगी। यदि बात नहीं बनी तो सरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को आयोजित राज्य स्तरीय पौंग बांध पुनर्वास एवं सलाहकार समिति की बैठक में ये निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि आबंटित भूमि का वास्तविक मालिक उपलब्ध नहीं है तो उसके कानूनी उत्तराधिकारी मुआवजे या ‘पोडा फंड’ के उपयोग या राजस्थान में भूमि के आबंटन के लिए अपील करने के पात्र होंगे। उन्होंने कहा कि यह निराशाजनक है कि राजस्थान सरकार की ओर से पौंग बांध विस्थापितों को 15.625 एकड़ भूमि प्रदान करने का मामला कई वर्षों से लंबित पड़ा है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद, जिनमें स्पष्ट किया गया है कि यह राजस्थान सरकार का दायित्व होगा कि पौंग बांध विस्थापितों को उनकी भूमि के बराबर सिंचाई योग्य भूमि उपलब्ध करवाई जाए और वास्तविक विस्थापितों या जिन्हें भूमि आबंटित की गई है, को आबंटित भूमि का मालिकाना हक दिया जाएगा, लेकिन राजस्थान सरकार मामले को सुलझाने के प्रति गंभीर नहीं है और पौंग बांध विस्थापितों को दूसरे स्थान पर भूमि प्रदान करने और अतिक्रमण हटाने में भी असफल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल सरकार इस उद्देश्य के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष और राजस्थान सरकार के साथ बैठक कर विस्थापितों के पुनर्वास के संदर्भ में मामले को सुलझाने के लिए अंतिम संभावनाओं को तलाशना चाहती है। प्रदेश सरकार अब इस मामले में पुनर्विचार के पक्ष में नहीं है, क्योंकि अब तक उच्च स्तरीय समिति की 17 बैठकें हो चुकी हैं और कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला है। उन्होंने कहा कि विस्थापितों की भूमि की बिक्री से स्थापित किए गए विशेष वित्तीय सहायता कोष-पोडा फंड के अंतर्गत विस्थापितों की बेटियों के विवाह के लिए आर्थिक सहायता बढ़ाकर 30 हजार और बेटों के लिए 25 हजार रुपए की जाएगी। स्वास्थ्य एवं राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार पूरे तथ्यों सहित अंतिम बार राजस्थान सरकार के साथ इस मामले को उठाएगी। आगामी बैठक में भी अगर कोई बात नहीं बनती है तो राज्य सरकार निःसंदेह सर्वोच्च न्यायालय में मामला उठाएगी। बहु-उद्देश्यीय परियोजनाएं एवं ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया ने प्रदेश की पूर्व भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि पौंग बांध विस्थापितों के मामले को गंभीरतापूर्वक नहीं लिया गया।

दूसरा रास्ता बाकी नहीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि बार-बार बैठकों के दौर के बावजूद ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार के पास सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के सिवाय कोई चारा नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के प्रयासों की अंतिम कड़ी में जनवरी माह में राजस्व मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी राजस्थान का दौरा करेंगे, लेकिन इस दौरे में भी विस्थापितों को न्याय नहीं मिला तो हिमाचल सरकार सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना का मामला दायर करेगी।

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