Header ad
Header ad
Header ad

राजन सुशांत ने संसद के नियम को ताक पे धर अपनी पत्नी तथा बेटे को अपना सचिव बनाया : भाजपा

धर्मशाला (अरविन्द शर्मा )

राजन सुशांत ने संसद के नियम को ताक पे धर अपनी पत्नी तथा बेटे को अपना सचिव बनाया : भाजपा

किया अब तक 18 लाख रू0 का भ्रष्टाचार :आरोप

 

विपिन परमार,प्रदेश भाजपा महामत्री, प्रदेश भाजपा के मिडिया सह प्रभारी  हिमांशु मिश्रा, एवंविनय शर्मा, जिला अध्यक्ष ने धर्मशाला से जारी एक संयुक्त प्रैस व्यक्तव्य में आश्चर्य व्यक्त किया है  कि आपप्रत्याशी राजन सुशांत ने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी शान्ता कुमार के नामांकन पत्र की जांच के दौरान अनावश्यक आपतियां उठाई । हालांकि  जिला निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें तत्काल रद्द कर दिया। इन नेताओं ने  राजन सुशांत की इस हरकत की कड़ी निंदा करते हुई कहा की  सांसदों को 30,000/- रूपए महीना पर निजी सचिव रखने की सुविधा है ।

उन्होंने कहा की  लोकसभा स्पीकर को यह शिकायतें मिली की बहुत से सांसद इस सुविधा का दुरपयोग कर रहे है।  मामला एथिक्स कमेटी को दिया गया। कमेटी ने प्रस्ताव पास किया कि सम्बन्धियों को निजि सचिव लगाने से सांसद की छवि खराब होती है।  सभी सांसदों को स्पष्ट निर्देश दिये गये कि कोई भी सांसद अपने सम्बन्धियों को निजि सचिव नियुक्त न करें।  सफेद टोपी पहनने वाले राजन सुशांत उन सांसदों में थे जिन्होंने नैतिकता के इस निर्देश का उलंघन किया और अपनी पत्नी सुधा सुशांत और बेटे शौर्य सुशांत को कागजों में निजि सचिव नियुक्त किया जबकि उनका  कोई कार्यालय तक नहीं था, वे कोई काम नहीं करते थे।  30,000/- कुल 18 लाख रू0 का भ्रष्टाचार करने वाले राजन सुशांत सदाचार की बात कर रहे है।

 

राजन सुशांत भाजपा प्रत्याशी के विरूद्ध अनाप-शनाप बोल कर सुर्खियों में बने रहना चाहते हैं।  वास्तव में जिस पार्टी की ओर से राजन सुशांत चुनाव लड़ रहे हैं उस पार्टी का एजेंडा मिडिया में सुर्खियों में रहना है। यदि राजन सुशांत यह सोचते हैं कि वे इस तरह से मोदी लहर को तथा शान्ता कुमार के व्यक्त्वि को बौना कर देंगे तो वे स्वयं भी ओछी छींटा कशी के लिए तैयार रहे। 

 

पिछले चुनाव में शान्ता कुमार ने सुशांत को दिन रात एक करके संसद में भेजा।  जिस पार्टी ओर नेता ने उन्हें संसद में भेजा उसके खिलाफ इस तरह की हरकतों से वे स्वयं जनता के सामने वेनकाब हो गये है। भाजपा ने उन्हें सदा के लिए निष्काषित कर दिया है। विधान सभा के चुनाव में उनकी पत्नी ने झूठा शपत पत्र दिया था  कि वे अवकाश प्राप्त अध्यापिका थी ।  जबकि वे संसद की निजि सचिव थी और 15000/- वेतन लेती थी ।

Share

About The Author

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Please Solve it * *

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)