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मेडिकल आॅफिसर एसोसिएसन ने 13 महिलाओं की मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

हिमाचल प्रदेश आॅफिसर एसोसिएसन ने छतीसगढ राज्य में परिवार नियोजन
कार्यक्रम के दौरान 13 महिलाओं की मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
एसोसिएसन ने इसके लिए डाक्टरों को दोशी ठहराने व उन्हें गिरफतार करने पर कडा
ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा है कि जाॅंच से पूर्व डाक्टरों पर इस प्रकार की
कारवाई कभी भी बर्दाषत नही की जा सकती और इस कारवाई से डाॅक्टरों को उनके
व्यवसायिक मनोवल विपरीत असर पड़ सकता है।
  एसोसिएसन के प्रधान डाॅ0 संत लाल षर्मा, उप प्रधान डाॅ0 यषपाल रांटा,
माहासचिव डाॅ0 जीवा नंद चैहान, प्रेस सचिव डाॅ0 सुषील षर्मा, सदस्य डाॅ0 दीपक
कैंथला व संगीत ढिलों ने एक संयुक्त व्यान में छतीसगढ राज्य में डाक्टरों की
गिरफतारी को सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेष की अवहेलना बताई है जिसमें न्यायालय
ने किसी भी डाॅक्टर की बगैर किसी जाॅंच के किसी भी गिरफतारी पर पूर्ण रोक लगाई
है। एसोसिएसन का कहना है कि छतीसगढ में राज्य सरकार की डाॅक्टरों के खिलाफ
एकतरफा कारवाई की हिमाचल प्रदेष मेडिकल आफफिसर ऐसासिएसन कड़ी निंदा करता है और
इन्होंने गिरफतार डाॅक्टरों की तुरन्त रिहाई की मांग की है।
  एसोसिएसन ने कुछ राज्य सरकारों द्वारा डाॅक्टरों को जैनरिक नाम से दवायें
लिखने के आदेषों को भी आम लोगों पर दवाई विक्रेताओं की मनमानी करने की छूठ
देने वाला कदम बताया है। उनका कहना है कि जैनरिक दवाओं के नाम से लोगों में
गलत संदेष दिया जा रहा है। उनका कहना है कि उन्हें जैनरिक नाम से दवायें लिखने
पर कोई आपति नही है पर इस बात को सुनिष्चित किया जाना चाहिए कि डाक्टरों
द्वारा लिखी गई जैनरिक नाम की दवा विक्रेता द्वारा सही दी जा रही है। उनका
कहना है कि सरकार को जैनरिक नाम से दवाओं की गुणवता को सुनिष्चित करते हुए
इसके मूल्य पर भी कडी नजर रखनी होगी।
  एसोसिएसन ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाष नडडा से आग्रह किया है
कि देष में सरकारी डाॅक्टरों के लिए अखिल भारतीय स्तर पर एक ही सेवा मैन्यूल
लागू किया जाये।

 

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