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मृत्यु दर को कम करने में राज्य के बेहतर प्रयास

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने शिशु मृत्यु दर, नवजात शिशु मृत्यु दर और पांच वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों की मृत्यु दर को कम करने में बेहतर प्रगति की है और प्रदश्ेा में यह दर राष्ट्रीय औसत से कम है। उन्होंने कहा कि राज्य में शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) प्रति हजार 36 तथा नवजात शिशु मत्यु दर (एनएमआर) प्रति हजार 28 है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह औसत क्रमशः 42 एवं 31 है। वह आज यहां हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय ग्रामीण मिशन द्वारा संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसी के सहयोग से माता एवं शिशु के स्वास्थ्य में सुधार विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
श्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में हिमाचल की विशिष्ट संस्कृति, सामाजिक उत्तरदायित्व और प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रजनन, मातृ, नवजात शिशु और किशोर स्वास्थ्य के संबंध में समावेशी दृष्टिकोण अपनाया है, जो मातृ स्वास्थ्य एवं शिशु जीवन में सुधार के प्रयासों को सुदृढ़ बनाएगा। प्रदेश में शीघ्र ही 7750 आशा कार्यकर्ताओं की तैनाती की जाएगी जो प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने में सहायक सिद्ध होंगी। आईजीएमसी शिमला तथा डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद राजकीय मेडिक कालेज, टांडा में दो पोषण पुनर्वास केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं तथा प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में विशेष नवजात देखभाल इकाइयां स्थापित की जा रही हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस वर्ष नवम्बर से सभी जिला मुख्यालयों पर कंडोम वैंडिंग मशीनें तथा किशोरियों को सैनेटरी नेपकिन उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। राज्य सरकार श्रेष्ठ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाने को प्राथमिकता प्रदान कर रही है तथा स्वास्थ्य विभाग के बजट को बढ़ाकर 22.6 प्रतिशत किया गया है। गत वर्ष यह 11 प्रतिशत था।
श्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में पहली बार अंतर सुविधा स्थानांतरण नामक नई योजना आरम्भ की गई है, जिसके अन्तर्गत रोगियों को सीधे ही आईजीएमसी शिमला जैसे संस्थानों में रैफर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं को लाने ले-जाने के लिए 125 समर्पित एम्बुलैंस स्वीकृत की गई हैं।
प्रधान सचिव स्वास्थ्य श्री अली रजा रिजवी ने रोकी जा सकने वाली शिशु मृत्यु के संबंध में समग्र दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि किशोरियों, गर्भाधान पूर्व, शिशु जन्म और प्रसव उपरांत बेहतर सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, महिला एवं बाल विकास तथा अन्य संबद्ध विभागों के मध्य बेहतर समन्यवय आवश्यक है।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव डाॅ. राकेश कुमार ने कहा कि भारत सरकार ने देश के 184 बेहतर प्रदर्शन न करने वाले जिलों का निर्धारण किया है, जहां मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के संबंध में विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि 12वीं पंजवर्षीय योजना में निर्धारित स्वास्थ्य मानक प्राप्त करने और वर्ष 2035 तक पांच वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों की मृत्यु दर घटाकर 20 करने के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसी के प्रतिनिधि श्री जेम्स ब्राउडर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विभिन्न स्वास्थ्य मानकों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है।
विशेष सचिव स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के निदेशक श्री अमिताभ अवस्थी, चार जिलों के उपायुक्त, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डाॅ. जयश्री शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, आईजीएमसी शिमला तथा टांडा मेडिकल कालेज के चिकित्सक, भारतीय चिकित्सा परिषद के प्रतिनिधि, शिशु विशेषज्ञ और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।
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