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मंदिर में भगदड़ से मरने वालों की संख्या 111 हुई

मध्य प्रदेश के रतनगढ़ माता मंदिर के रास्ते पर मची भगदड़ में मौत का आंकड़ा बढ़कर 111 पहुंच गया है। जबकि अस्पताल में भर्ती 100 से ज्यादों लोगों में से कई की हालत गंभीर बनी हुई है। प्रशासन ने दावा किया है कि पुल की रेलिंग टूटने के बाद फैली अफवाह से भगदड़ मची। लेकिन लोगों का कहना है कि इसके लिए पुलिस जिम्मेदार है। हालांकि प्रशासन ने लाठी चार्ज के आरोपों से इंकार किया है। पुलिस के मुताबिक पुल टूटने की अफवाह के बाद भगदड़ मची।
मंदिर का रास्ता एक संकरे पुल से होकर गुजरता है। इसके बावजूद दर्शन के लिए आने और लौटने वाले लोगों के लिए अलग इंतजाम नहीं किए गए थे। हालांकि, दावा किया गया है कि पुल की रेलिंग टूटने के बाद फैली अफवाह से भगदड़़ मची। लेकिन लोगों का कहना है कि इसके लिए पुलिस का लाठीचार्ज जिम्मेदार है।
मध्यप्रदेश के दतिया में रतनगढ़ मंदिर में आस्था की नवमी काल की नवमी में बदल गई। ऐतिहासिक मंदिर में नवरात्र के दौरान हर साल की तरह लाखों श्रद्धालु जुटे थे। नवमी में सबसे ज्यादा भीड़ जुटती है, उसपर रविवार का दिन, मंदिर एक छोटी पहाड़ी पर है। उसका रास्ता सिंध नदी पर बने संकरे पुल से होकर गुजरता है। लाखों लोगों का रेला गुजर रहा था, उसी बीच किसी ने अफवाह उड़ा दी कि पुल टूट रहा है। बस लोगों ने भागना शुरू कर दिया। एक दूसरे पर पांव रखकर लोग भागने लगे। इस भगदड़ में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे दब गए।
चश्मदीदों के मुताबिक जिस बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं की भीड़ यहां जुटती है उसे नियंत्रित करने के इंतजाम नहीं किए गए थे। मंदिर जाने वाले और दर्शन के बाद मंदिर से लौटने वाले लोगों को अलग-अलग गुजारने के कोई इंतजाम नहीं थे। आने और जाने वाले लोगों को अलग करने के लिए बांस की बल्लियों की कतारें नहीं बनाई गई थीं। लोगों की भारी भीड़ संभालने के लिए पुलिस वाले भी कम थे। आरोप है कि जब सिंध नदी पर बने पुल पर भीड़ रेंगने लगी तो पुलिस वालों ने लोगों को आगे बढ़ाने के लिए हल्का लाठीचार्ज कर दिया। आरोप है कि पुलिस की लाठी से बचने के लिए लोग भागे और भगदड़ मच गई। कुछ ने तो बचने के लिए सिंध नदी में ही छलांग लगा दी।
भगदड़ में जख्मी होने वालों को ग्वालियर और दतिया के अस्पतालों में भर्ती करवाया गया है। मध्यप्रदेश में चुनाव के चलते आचार संहिता लागू है, लिहाजा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चुनाव आयोग से इजाजत लेकर मरने वालों के परिजनों को डेढ़ लाख, गंभीर रुप से घायलों के लिए 50 हजार औऱ मामूली तौर पर घायलों के लिए 25 हजार के मुआवजों का ऐलान किया। वहीं, घटना की न्यायिक जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
गौरतलब है कि 2006 की नवरात्र में भी यहां ऐसा ही वीभत्स हादसा हुआ था। नदी पार करके दर्शन के लिए जा रहे 50 तीर्थयात्री शिवपुरी के मनिखेड़ा बांध से पानी छोड़े जाने के कारण सिंध नदी में बह गये थे। तब आरोप लगे थे कि बांध से पानी छोड़ने की सूचना न होने के कारण हादसा हुआ था।

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