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मंडी में गरीबों के मकानों की तोडऩे को लेकर आप ने सौपा मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय,शिमला, और मुख्यमन्त्री को ज्ञापन

मंडी, 23 जुलाई (पुंछी) : मंडी शहर में नगर परिषद द्धारा गरीबो के आशियानो को तोडऩे पर आम आदमी पार्टी भडक़ उठी है। मंगलवार को मंडी नगर में जारी गरीबों के मकानों की तोड़ फोड़ को लेकर जिलाधीश के माध्यम से मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय,शिमला, और मुख्यमन्त्री को ज्ञापन भेजा। जिलाधीश को सौंपे ज्ञापन में पार्टी के राष्ट्रीय परिषद सदस्य, देशराज शर्मा ने कहा कि कांग्रेस व बीजेपी दोनो सरकारों द्वारा वोट बैंक के लिए गरीब लोगों के घरों को नियमित करने की घोषणाओं और वायदों के तुष्टिकरण के बीच मंडी नगर परिषद की भेदभावपुर्ण गलत रिर्पोट के आधार पर हाईकोर्ट को गुमराह करके नगर परिषद के ही अनापति प्रमाण पत्र(एन.ओ.सी.) के आधार पर बिजली-पानी के कनेक्शन लगे दशको पुर्व बनें गरीब और साधनहीन मध्यमवर्गीय परिवारों के जिन घरों को तो$डकर जिन्हे बेघर करके सडुक पर ला खड़ा कर दिया गया है। पार्टी इस कार्रवाई की भतसर््ना करती है तथा मांग करती है कि उन्हे सरकार दो विश्वा जमीन पर मकान बनाकर पुर्नवास करें। उन्होने कहा कि दोषी नगर परिषद पूरे शहर को खंडहर बनाने पर उतारू है तथा 539 अन्य सरकारी भूमि व बिना अनुमति निर्माण नगर परिषद द्वारा बताया जा रहा है। जब तक नगर परिषद किसी नतीजे पर नहीं पंहुच जाती तब तक लोगों के घरों को तोडऩे पर स्टे दिया जाए। उन्होने कहा कि मकान तोडऩे व जमीन किराये के नाम पर जो शुल्क गरीब बेघरों से बसुलने के नोटिस दिए जा रहे हैं यह शुल्क जिम्मेदार राजस्व विभाग, वन विभाग और नगर परिषद के घुसखोर अधिकारियों, अध्यक्षों और पार्षदों से बसुला जाए और उन्हे तुरंत बर्खास्त करके जेल भेजा जाए जिन्होने स्वेछाचारिता के चलते घूस खाकर लोगों को गुमराह करके निर्माण होने दिया। कसूर व्यवस्था का और दण्ड झेल रही जनता। मंडी नगर में कभी व्यवस्था के मुख्य वाहक रहे मजदूर, धोबी, नाई, मोची, घराटी, भंगी, ब$ढई प्यादे, हरकारे, लादी, बुनकर, दस्तकार, लुहार, दर्जी और कई तरह के अन्य कार्य करने वाले गरीब और साधनहीन मध्यमवर्गीय लोगों को अल्पआय पगार पर सिर छुपाने की भुमी देकर काम चलता रहा। पंहुच वाले शरमायेदार और जानकार लोगों ने तो राजस्व कानुनों की तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर और घुसखोर राजस्व अधिकारियों से जुगा$ड करके राजस्व रिकार्ड पक्के कर लिए। लेकिन उक्त मजदूर, धोबी, नाई, मोची, घराटी, आदि के पास पंहुच और घूस देने के लिए कुछ नहीं था। उन्होने कहा कि कांग्रेस व बीजेपी सरकारों द्वारा वोट बैंक के लिए गरीब और साधनहीन मध्यमवर्गीय परिवारों के घरों को नियमित करने की घोषणाओं और वायदों के तुष्टिकरण तथा राजस्व विभाग और स्थानीय निकायों के घुसखोर अधिकारियों, अध्यक्षों और पार्षदों की स्वेछाचारिता के चलते घूस खाकर लोगों को गुमराह करके निार्माण होने दिया गया। अब राजस्व विभाग और स्थानीय निकायों के घुसखोर अधिकारियों, अध्यक्षों और पार्षदों का दोष छुपाने के लिए नगर परिषद ने हाईकोर्ट को गुमराह करके गरीब, मजदूर, कामगार और साधनहीन मध्यमवर्गीय परिवारों के घर तो$डकर निशाना बनाया। जबकि पदेश सरकारों द्वारा पाईवेट यूनवर्सिटियों, कालेजों और पोजैक्टों को हजारों बीघा जमीन दे दी गई। लेकिन कांग्रेस व बीजेपी सरकारों के इंदिरा आवास योजना, शहरी गरीबों को संपति के अधिकार देने के लिए राजीव आवास योजना तथा दो विश्वा पर मकान, गरीबी उन्मुलन का 20 सूत्री कार्यक्रम और अटल आवास जैसी योजनाओं के रास्ते भी सरकारें इन गरीबों को संवैधानिक अधिकार पदान न कर सकी है ।
पार्टी कि मांगे
(1). मंडी नगर परिषद की भेदभावपूर्ण गलत रिर्पोट के आधार पर हाईकोर्ट को गुमराह करके नगर परिषद के ही अनापति प्रमाण पत्र(एन.ओ.सी.) के आधार पर बिजली-पानी के कनेक्शन लगे दशको पूर्व बनें गरीब और साधनहीन मध्यमवर्गीय परिवारों के जिन घरों को तोडकर जिन्हे बेघर करके स$डक पर ला दिया गया है उन्हे सरकार दो विस्वा जमीन पर मकान बनाकर पुर्नवास करें।
(2). मकान तोडऩे व जमीन किराये के नाम पर जो शुल्क गरीब बेघरों से बसुलने के नोटिस दिए जा रहे हैं यह शुल्क जिम्मेदार राजस्व विभाग, वन विभाग और नगर परिषद के घुसखोर अधिकारियों, अध्यक्षों और पार्षदों से बसुला जाए और उन्हे तुरंत बर्खास्त करके जेल भेजा जाए जिन्होने स्वेछाचारिता के चलते घूस खाकर लोगों को गुमराह करके निार्माण होने दिया। (3). दोषी नगर परिषद पुरे शहर को खंडहर बनाने पर उतारू है तथा 539 अन्य सरकारी भुमी व बिना अनुमति निर्माण नगर परिषद द्वारा बताया जा रहा है। जब तक नगर परिषद किसी नतीजे पर नहीं पंहुच जाती तब तक लोगों के घरों को तो$डने पर स्टे दिया जाए।

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