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मंगल पर धूल के नीचे दबे हैं बर्फ के ग्लेशियर

लंदन। वैज्ञानिकों ने कहा है कि मंगल पर 150 अरब घन मीटर से अधिक बर्फ के ग्लेशियर हैं जो इस लाल ग्रह की पूरी सतह को बर्फ की एक मीटर से भी अधिक मोटी परत से ढंकने के लिए पर्याप्त हैं। ग्लेशियरों को धूल की एक मोटी परत ढंके हुए है जिससे वे वहां की जमीन की ही सतह नजर आते हैं लेकिन रडार मापन से यह पता चलता है कि धूल के नीचे बर्फ के रूप में ग्लेशियर हैं। लंबे समय से वैज्ञानिक नहीं जानते हैं कि यह बर्फ पानी के जमने से (एच 2ओ) बनी है या कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ 2) है या क्या यह मिट्टी है। नासा के उपग्रह और ‘मार्स रीकानिसन्स आर्बिटरÓ के रडार मापन का उपयोग कर और बर्फ के प्रवाह से उन्हें जोड़कर देखने के बाद शोधकर्ता यह निर्धारित करने में सक्षम हुए कि यह पानी से बना बर्फ है। कोपहनहेगन यूनीवर्सिटी में नील्स बोर इंस्टीट्यूट के नन्ना बी. कार्लसन ने बताया, ‘हमने बर्फ की गतिविधियों और उसकी परत की मोटाई का अंदाजा लगाने के लिए 10 साल पहले के रडार मापन पर गौर किया। कार्लसन ने बताया कि एक ग्लेशियर कुल मिलाकर बर्फ का एक विशालकाय टुकड़ा होता है और यह तैरता है और एक आकार धारण करता है जो हमें इसके नरम होने के बारे में बताता है। इसके बाद हम इसकी तुलना पृथ्वी पर मौजूद ग्लेशियरों के व्यवहार से करते हैं और उससे हम बर्फ के प्रवाह को समझ पाने में सक्षम होते हैं। ये ग्लेशियर मंगल पर 300 से 500 अक्षांश के बीच स्थित हैं। वे उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में पाए जाते हैं। कार्लसन ने बताया, ‘हमने हिसाब लगाया है कि ग्लेशियर में बर्फ 150 अरब घन मीटर बर्फ से अधिक है। यह मंगल की पूरी सतह को 1.1 मीटर बर्फ की चादर से ढंक सकती है। मंगल पर वायुमंडलीय दबाव इतना कम है कि पानी से बनी बर्फ आसानी से वाष्पीकृत होकर वाष्प बन जाती है लेकिन ग्लेशियर धूल की मोटी परत के नीचे अच्छी तरह से सुरक्षित हैं।

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