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ब्लैक मनी पर सख्त हुई मोदी सरकार

wनई दिल्ली। ब्लैक मनी पर मोदी सरकार ने इंडस्ट्री लॉबी ग्रुप्स के साथ कुछ सांसदों के दबाव को ठुकरा दिया है। सरकार की तरफ से लागू किए गए अहम कदमों को कमजोर करने के लिए इन्होंने संपर्क किया था। इनमें एक लाख से ऊपर के लेन-देन पर पैन नंबर का इस्तेमाल और ब्लैक मनी बिल शामिल हैं। इनकी घोषणा बजट में इकॉनमी में नाजायज फंड को रोकने के लिए की गई थी। बड़े पैमाने पर नकद लेन-देन करने वाले कई सेक्टर्स के प्रतिनिधियों ने मंत्रियों से संपर्क कर एक लाख से ऊपर के हर ट्रांजैक्शन पर परमानेंट पैन नंबर देने को खत्म करने की मांग की थी। ऐसे कई सेक्टर्स हैं, जो कि ब्लैक मनी संग्रह के लिए जाने जाते हैं और इनमें नकद लेन-देन ही प्रमुख हैं। इकॉनमी में नाजायज नकदी की मौजूदगी का प्रभाव अन्य सेक्टर्स पर भी पड़ता है। इनमें कैश के जरिए टिकाऊ वस्तुओं और लग्जरी आइटम्स की खरीदारी है। स्थानीय अर्थव्यवस्था में ब्लैक मनी को रोकने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रियल एस्टेट डील्स में 20,000 से ऊपर के अडवांस पेमेंट को बैन करने का प्रस्ताव रखा है। तर्क दिया जा रहा है कि इसका आर्थिक विकास और रोजगार पर बुरा असर पड़ेगा क्योंकि डिमांड प्रभावित होगी। हालांकि सरकार के सूत्रों का कहना है कि ये कदम इकॉनमी में ब्लैक मनी के प्रसार को रोकने के लिए उस अनिवार्य प्लान का हिस्सा है, जिसमें बीजेपी ने चुनावी वादे किए थे।

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