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’बाढ़ प्रबन्धन कार्यक्रम के तहत वित्तीय सहायता 90;10 प्रतिशत करने का आग्रह’

सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य तथा बागवानी मंत्री श्रीमती विद्या स्टोक्स ने आज नई दिल्ली

में केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय द्वारा ‘जल मंथन’ पर आयोजित सम्मेलन में कहा कि
इससे जल संसाधन परियोजनाओं में आने वाली बाधाओं को दूर करने में
सहायता मिलेगी विशेषकर हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य को इसका विशेष लाभ
होगा। सम्मेलन की अध्यक्षता केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री सुश्री ऊमा भारती ने की।

श्रीमती स्टोक्स ने प्रदेश में सिंचाई, कमान क्षेत्र विकास एवं बाढ़ नियंत्रण कार्यो

पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश में सिंचाई योग्य क्षेत्र बहुत सीमित है। कुल
5.83 लाख हैक्टेयर कृषि योग्य क्षेत्र में से 3.35 लाख हैक्टेयर क्षेत्र को
सिंचाई के लिए चिहिन्त किया गया है। वर्तमान में, 2.60 लाख हैक्टेयर क्षेत्र पर
सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है।

उन्होंने कहा कि एआईबीपी के अन्तर्गत राज्य मंे एक वृहद, तीन मध्यम और 407
लघु सिंचाई योजनाओं का कार्य पूरा किया गया है। 650.14 करोड़ रुपये की
केन्द्रीय सहायता से 69,650 हैक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा प्रदान की गई है।
उन्होंने कहा कि 338.82 करोड़ रुपये की 109 लघु सिंचाई योजनाओं को
स्वीकृति के लिए केन्द्र सरकार को भेजा गया है, इससे 17792 हैक्टेयर क्षेत्र को
सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाई जा सकेगी। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री से इन
योजनाओं की शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया।

सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में 2.31 लाख हैक्टेयर क्षेत्र बाढ़
प्रभावित है। उन्होंने कहा कि 182.04 करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता से स्वां
नदी के द्वितीय चरण एवं जिला सिरमौर की बात्ता नदी के तटीयकरण का कार्य पूरा
किया गया है, जबकि कांगड़ा जिले में छोछ खड्ड और स्वां नदी के तटीयकरण का
कार्य प्रगति पर है।

श्रीमती स्टोक्स ने बाढ़ प्रबन्धन कार्यक्रम के लिए पूर्व में निर्धारित
दिशा-निर्देशों के अनुसार वित्तीय सहायता 90ः10 प्रतिशत के आधार पर पुनः
बहाल करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे विशेष
श्रेणी वाले राज्यों के लिए 70ः 30 प्रतिशत का संशोधन हितकारी नहीं है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में जलाश्यों के जिर्णोद्धार एवं बहाली की
संभावना न के बराबर है, क्योंकि राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूनतम पांच
हैक्टेयर और शहरी क्षेत्रों में 2 से 10 हैक्टेयर के जलाश्य उपलब्ध न होने के
कारण इस कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता राशि से प्रदेश
वंचित हो रहा है। उन्होंने इस कार्यक्रम के अंतर्गत छोटे जलाश्यों के निर्माण का
भी प्रावधान करने का आग्रह किया, जिससे जल संसाधनों के विकास को बढ़ावा
मिलेगा।

 

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