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बागवानों की समस्याओं के समाधान के लिए स्थापित होगा , ‘एप्पल हार्वेस्टिंग मानीटरिंग सेल’: श्रीमती विद्या स्टोक्स

12 जुलाई शिमला :सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य तथा बागवानी मंत्री श्रीमती विद्या स्टोक्स ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा इस सेब मौसम में बागवानों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए ‘एप्पल हार्वेस्टिंग मानीटरिंग सेल’ स्थापित किया जाएगा, जो 15 जुलाई से कार्य करेगा। यह प्रकोष्ठ बागवानी निदेशालय में स्थापित होगा और 24 घंटे कार्यशील रहेगा। प्रकोष्ठ में दर्ज बागवानों की शिकायतों एवं समस्याओं की नियमित रिपोर्ट बागवानी मंत्री एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव, बागवानी को उपलब्ध करवाई जाएगी ताकि उनकी समस्याओं का निपटारा शीघ्र सुनिश्चित बनाया जा सके।
श्रीमती स्टोक्स आज यहां सेब मौसम के दौरान प्रबंधों को लेकर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए बोल रही थीं।
बागवानी मंत्री ने कहा कि बागवानी विभाग द्वारा इस वर्ष लगभग साढ़े तीन करोड़ सेब की पेटियों के उत्पादन का अनुमान है। इस सेब सीजन में 7.65 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान है, जिसमें से 6.89 लाख मीट्रिक टन सेब प्रदेश से बाहर भेजा जाना संभावित है। उन्होंने कहा कि सेब ढुलाई के लिए 76591 ट्रकों की आवश्यकता का अनुमान लगाया गया है, जिसके लिए समुचित व्यवस्था कर दी गई है। 260 सेब एकत्रिकरण केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिनमें से 22 जुलाई तक 175 केंद्र स्थापित कर दिए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि बागवानी क्षेत्र प्रदेश की आर्थिकी का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इस क्षेत्र से 3200 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक आय सृजित होती है। उन्होंने कहा कि बागवानों की समस्याओं के प्रति सरकार गंभीर है और उनकी सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं ताकि उन्हें सेब विपणन में किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि सेब उत्पादक जिलों के जिला प्रशासन, पुलिस, लोक निर्माण, बागवानी विभाग एवं संबंधित एजेंसियों इत्यादि को इस बारे में उचित दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
श्रीमती स्टोक्स ने कहा कि सेब की पेटियों एवं ट्रे की समुचित व्यवस्था की गई है तथा इसकी जमाखोरी एवं कालाबाजारी पर पूर्ण नजर रखी जाएगी तथा बागवानों को पर्याप्त मात्रा में उचित दरों पर गुणात्मक कार्टन उपलब्ध करवाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा क्रयता एवं कमीशन एजेंटों के पंजीकरण की पुख्यता व्यवस्था की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार के विवाद में उनसे तुरंत संपर्क बनाया जा सके। इसके अतिरिक्त बागवानों को विपणन संबंधी जानकारी समय-समय पर उपलब्ध करवाई जाएगी।
बैठक में लोक निर्माण विभाग द्वारा बागवानी मंत्री को सड़कों के रखरखाव एवं सेब सीजन के दौरान अग्रिम व्यवस्था को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वांगतु-शिमला-कालका तथा मनाली से चण्डीगढ़ राष्ट्रीय उच्च मार्ग बेहतर स्थिति में है।
उन्होंने कहा कि ठियोग-हाटकोटी-रोहड़ू राज्य उच्च मार्ग को सेब ढुलाई के लिए ठीक कर दिया गया है और विभाग ने सेब सीजन के दौरान मार्ग पर सुचारू परिवहन को बनाए रखने के लिए उचित प्रबंध किए हैं। उन्होंने कहा कि रोहड़ू से सेब के ट्रकों का सुचारू संचालन सुनिश्चित बनाने के लिए वाया सुंगरी तथा टिक्कर-बाघी-नारकण्डा मार्ग को भी उपयोग में लाया जाएगा। ठियोग मार्ग पर परिवहन दबाव को कम करने के लिए सेब के ट्रकों को छैला-सैंज-कुमारहट्टी वाया ओछघाट मार्ग को उपयोग में लाया जाएगा। शिमला आने वाले ट्रक मैहली-शोघी मार्ग का उपयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि चिन्हित स्थलों पर विभाग द्वारा पर्याप्त संख्या में मशीनरी तैनात की जाएगी। उन्होंने कहा कि किन्नौर जिले के सांगला से आगे भू-स्खलन वाले स्थान पर डेढ़ माह के भीतर पुल का निर्माण कर दिया जाएगा।
श्रीमती स्टोक्स ने पुलिस विभाग को शिमला-हाटकोटी मार्ग पर यातायात सुचारू रखने के लिए पुलिस के पर्याप्त संख्या में जवान तैनात करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उपायुक्त शिमला बागवानों से विचार-विमर्श कर राज्य उच्च मार्ग पर बड़े ट्रालों को न चलाने के लिए अंतिम निर्णय लेंगे।
बागवानी निदेशालय में स्थापित ‘एप्पल हार्वेस्टिंग मानीटरिंग सेल’ में सहायक अनुसंधान अधिकारी श्री अशोक कुमार शर्मा (मोबाईल नम्बर 9418383249) प्रातः 9 बजे से शाम 5 बजे तक, सहायक अनुसंधान अधिकारी श्री गुरविन्दर सिंह (मोबाईल नम्बर 9418361425) शाम 5 बजे से प्रातः 1 बजे तक तथा बागवानी विकास अधिकारी श्री समीर सिंह राणा (मोबाईल नम्बर 9418020644) प्रातः 1 बजे से प्रातः 9 बजे तक उपलब्ध रहेंगे।
अतिरिक्त मुख्य सचिव, बागवानी श्री विनीत चैधरी ने बैठक में सेब सीजन के दौरान प्रबंधों को लेकर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शिमला जिले के ठियोग में नियंत्रण केंद्र 15 जुलाई से आरम्भ कर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पांच उप-नियंत्रण केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सेब ढुलाई में लगे ट्रकों को जीपीएस प्रणाली से अनुश्रवण किया जाएगा। चयनित स्थानों पर क्लोज़ सर्किट कैमरे भी लगाए जाएंगे ताकि पूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित बनाई जा सके। ट्रक चालकों को प्रशासन द्वारा पहचान पत्र उपलब्ध करवाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पैकिंग सामग्री की समय पर उपलब्धता, फल मण्डियों को क्रियाशील बनाने तथा मण्डी मध्यस्थता योजना का सुचारू कार्यान्वियन सुनिश्चित बनाया जाएगा।
विभिन्न जिलों के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, बागवानी, हिमफैड, एपीएमसी, एचपीएमसी, लोक निर्माण विभाग तथा जिला प्रशासन के उच्च अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।
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संख्या 767/2013-पब शिमला 12 जुलाई 2013

सेब प्रापण के लिए मण्डी मध्यस्थता योजना 15 जुलाई से आरम्भ
प्रदेश सकार के एक प्रवक्ता ने आज यहां कहा कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2013 के सेब प्रापण के लिए मण्डी मध्यस्थता योजना को स्वीकृति प्रदान कर दी है। सेब के लिए मण्डी मध्यस्थता योजना 22 जुलाई, 2013 से 31 अक्तूबर, 2013 तक लागू की जाएगी।
प्रवक्ता ने कहा कि कुल सेब उत्पादन का 10 प्रतिशत उत्पादन लगभग 90,343 मीट्रिक टन से मण्डी मध्यस्थता योजना के तहत 6 रुपये 50 पैसे प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा जाएगा। योजना के अन्तर्गत हैंडलिंग चार्जिज गत वर्ष की तरह 1.95 रुपये प्रति किलोग्राम होगा, जबकि कल्पित विक्रय वसूली 3 रुपये प्रति किलोग्राम रखी गई है। इस वर्ष 260 सेब प्रापण केन्द्र आरम्भ करना प्रस्तावित है, जो बागवानों की मांगों के अनुसार खोले जाएंगे।
उन्होंने कहा कि सेब का प्रापण एचपीएमसी, हिमफैड तथा उद्यान विभाग द्वारा किया जाएगा। इस योजना के तहत सेब का प्रापण 18 किलोग्राम के बैग/क्रेटस में 25 प्रतिशत अधिक फल सहित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मण्डी मध्यस्थता योजना के तहत सेब का व्यास 51 मि.मी. या इससे अधिक होना चाहिए तथा खराब फल जैसे सड़े-गले या पक्षियों द्वारा काटे, खाये, बीमारी वाले जिसमें स्कैब, ईथरल स्प्रे, कच्चा व अधिक पक्का हुआ और लघु आकार का ज्यादा खरांेच लगा सेब स्वीकार नहीं किया जाएगा। विधायन योग्य सेब में केवल हल्का ओलाग्रस्त व खरोंच लगा फल लिया जाएगा। सेब का प्रापण केवल कार्डधारक बागवानों से किया जाएगा।

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