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बल्हघाटी में सेवानिवृत इंजिनियर ने उगाया सेब, जी-ग्रेड एप्पल रिसर्च स्टेशन के नाम से शीघ्र ही पंजीकृत होगी सेब की नर्सरी, प्रदेश का बागवानी विभाग करेगा मदद, बागवानी विभाग के सभी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए भेजा पत्र

3 जुलाई मण्डी (पुंछी )फसलों की पैदावार के लिए मिनी पंजाब के नाम से प्रसिद्व मण्डी जिला की बल्ह घाटी में उस समय एक नया कीर्तिमान जुड गया, जब बल्ह की ग्राम पंचायत बडसू के बगला में प्रदेश बिजली बोर्ड के लारजी पन विद्युत परियोजना से सेवानिवृत सहायक अभियन्ता श्री अच्छरू राम गौतम ने अपने कीचन गार्डन में शौक के तौर पर सेब के पौधे लगाए और आज उनकी कडी मेहनत से इन पौधों में सेब लग रहे हैं और सेब भी इतने मीठे तथा रसीलें हैं कि देखकर यह नहीं लगता कि यह सेब मैदानी क्षेत्रों में उगाए गए हैं । मूल रूप से मण्डी शहर के अच्छरू राम गौतम 1996 में सेवानिवृति के बाद बल्ह घाटी के बगला में शिफट कर गए । उन्होंने शौक के तौर पर अपने कीचन गार्डन बगला में ग्राम पंचायत नाउ पनाउ के टेपर गांव से वर्ष 2004 में सेब के चार पौधे लगाए ।
पेडों की उन्होंने बच्चों की तरह सुबह शाम परवरिस की तथा वर्ष 2010 में इन पौधों में 5 सेब लगे लेकिन यह सेब जल्दी ही पेडों से गिर गए पर उन्होंने अपनी मेहनत जारी रखी । अच्छरू राम ने बागवानी विभाग के वैज्ञानिक डा0 चिरंजीव परमार से पेडों पर से सेब गिरने की बात की । उन्होंने उन्हें सलाह दी कि आपने उंचाई वाले स्थानों पर उगने वाले सेब के पौधे लगा रखे हैं तथा आपको अगर मैदानी क्षेत्र में सेब उगाने ही है तो आप लो हाईट के पौधे लगाएं ।
श्री अच्छरू राम गौतम ने वर्ष 2010 में घुमारवीं, जिला बिलासपुर के हरिमन रिसर्च सैंटर से सेब के 8 पौधे लाए । दो पौधों पर वह लगातार रिसर्च करते रहे तथा 2013 में उनकी खुशी का ठिकाना न रहा जब इन दो पौधों पर बम्पर सेब की फसल हुई । उन्होंने टेपर नाम स्थान से जो पौधे लाकर उगाए थे उन पर भी लो हाईट के सेब की कलमें की तथा आज एक साल बाद उनका यह प्रयोग भी सफल रहा ।


इंजिनियर गौतम ने लगभग 50 पौधे सेब के लो हाईट किस्म की बिना बीज के कलमें लगा रखी हैं तथा वह तैयार भी हो रही है जिन पर वह लगातर प्रयोग कर रहे हैं । उनकी इसी सफलता को देखकर प्रदेश बागवानी विभाग द्वारा भी उनके रिसर्च सैंटर को पंजीकृत करने के लिए शीघ्र ही आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के लिए उनको पत्र भेजा गया है ।
देहरादून, राजस्थान तथा बिहार से प्रयोग के तौर पर मैदानी क्षेत्रों में उगाए जाने वाले सेब की नर्सरी की अच्छरू राम गौतम के पास डिमांड आई है ।
श्री अच्छरू राम गौतम की कडी मेहनत व लग्न का ही परिणाम है कि बल्ह घाटी के मैदानी क्षेत्रों में जिस तरह तीन वर्ष के भीतर ही सेब के पौधों पर फसल लगाने का प्रयोग सफल रहा है तथा वह बल्ह घाटी के साथ-साथ प्रदेश के मैदानी तथा गर्म क्षेत्रों में सेब उगाने के लिए लोगों के प्रेरणा स्त्रोत बनकर उभरे हैं तथा उनका कहना है कि वह मैदानी क्षेत्रों में सेब उगाने के लिए लोगों को नि:शुल्क जानकारी देंगे । बागवानी विभाग के अधिकारी भी उनके किचन गार्डन में उगाए गए सेबों का निरीक्षण कर चुके हैं तथा उन्होंने इस सेब को मीठा तथा रसदार बताया है ।

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