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बच्चों की सर्वोत्तम हितों का संरक्षण आवश्यक- सी.पॉलरासु


धर्मशाला, 27जून: बालक (बच्चों) के उचित विकास के लिए आवश्यक है कि प्रत्येक
व्यक्ति द्वारा उसकी निजता और गोपनीयता के अधिकार का सभी प्रकार से सम्मान
किया जाए तथा प्रत्येक प्रक्रम पर बालक के सर्वोत्तम हितों और कल्याण को अधिक
महत्व दिया जाए। बालक के शारीरिक स्वास्थ्य, भावनात्मक, बौद्धिक और सामाजिक
विकास को सभी स्तरों पर सुनिश्चित किया जाए।
 यह उद्गार उपायुक्त, कांगड़ा सी.पॉलरासु ने आज राष्ट्रीय जन सहयोग एवं बाल
विकास संस्थान लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में डीआरडीए हॉल, धर्मशाला में दो
दिवसीय किशोर न्यास अधिनियम-2000 एवं बच्चों का यौन उत्पीड़न निरोधक
अधिनियम-2012 के प्रावधानों की कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर प्रकट करते हुए
कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उन्हें नशे तथा अपराधों से बचाकर देश की
प्रगति के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है। समाज में बच्चों के यौन शोषण की
बढ़ती घटनाओं पर ध्यान कें्रदित करवाते हुए उन्होंने कहा कि कानून की सही
जानकारी न होने के कारण इस अधिनियम के कार्यान्वयन में अनेकों कठिनाईयों का
सामना करना पड़ता है। जागरूकता व इस अधिनियम की जानकारी से एक ओर जहां बच्चों
को यौन शोषण से मुक्ति की राहें खुलेंगी वहीं अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा
दिलाने में यह कार्यशाला सहायक सिद्ध होगी।
उपायुक्त ने इस अवसर पर कांगड़ा, चम्बा, मंडी, कूल्लू, बिलासपुर, हमीरपुर एवं
ऊना जिला के बाल कल्याण अधिकारियों, बाल विकास समितियों और किशोर न्यास
अधिनियम से जुड़े हुए स्वास्थ्य एवं पुलिस विभाग के अधिकारियों एवं चाईल्ड लाईन
के कर्मियों को इस कार्यशाला में संबंधित अधिनियमों की विस्तृत जानकारियों
हासिल करके अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में उन्हें प्रभावी ढंग से कार्यान्वित
करने का आग्रह किया।
इस अवसर पर जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ0 बीएम गुप्ता ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग
एवं पुलिस इन अधिनियमों को लागू करने में एक महत्वपूर्ण कड़ी है तथा इनकी जांच
पर ही पूरा केस निर्भर करता है। अतः इस प्रकार की कार्यशालाओं से संबंधित
सहयोगी विभागों में तालमेल बढ़ेगा और अपराधियों को सजा दिलाने में सक्षम होंगे।
राष्ट्रीय जन सहयोग एवं बाल विकास संस्था लखनऊ के क्षेत्रीय निदेशक डॉ
के.सी0जॉर्ज ने इस कार्यशाला में किशोर न्याय अधिनियम-2000 तथा यौन शोषण
संरक्षण अधिनियम-2012 से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारियां दीं।
इस कार्यशाला में प्रदेश के पांच जिलों के 70 से भी अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे
हैं जिन्हें इन अधिनियमों से जड़े विभिन्न कानूनी पहलुओं से अवगत करवाया जाएगा।
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