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बंदरों ने किया किया ढाई वर्षीय नन्ही बच्ची पर हमला

मंडी, 10 जुलाई (पुंछी) : शहर की पैलेस कालोनी में उस समय अफरा -तफरी मच गई जब बन्दरो के एक झुन्ड ने बुधवार शाम पौने 5 बजे पैलेस कालौनी में एक घर के बाहर खेल रही एक ढाई वर्षीय नन्ही बच्ची को झपटने कीे कोशिश की। बन्दरो के हमले से नन्ही बच्ची ने चिल्लाना शुरू कर दिया। सौभाग्यवश पड़ोस की एक महिला ने अपनी जान की परवाह न करते हुए पास पड़े डंडे से बन्दरो को भगाया। गनीमत रही कि अगर पड़ोस की उक्त महिला वंहा पर न होती तो बन्दर नन्ही बच्ची का अपना शिकार बना सकते थे। बन्दरो ने जिस समय यह हमला किया उस समय नन्ही बच्ची की मां लंैटर पर से कपड़े उठाने गई थी । लैटर से अपने जिगर के टुक्कड़े पर बन्दरो द्धारा हमला देखकर नन्ही बच्ची की मां बाबलो की तरह लैंटर से नीचे पहुंची और उसने अपनी नन्ही बच्ची को रोते हुए अपने सीने से लगाया। उल्लेखनीय है कि बन्दरो द्धारा लोगो पर जानलेवा हमला करना कोई शहर में पहला मामला नंही है। गत 2 महीने पहले भी बन्दरो ने मंडी कालेज की एक छात्रा पर जानलेवा हमला किया था जिस कारण उक्त छात्रा को पी.जी.आई रैफर किया गया था और उक्त छात्रा अभी भी ठीक नंही है। बन्दरो ने पिछले 3 महीनो में शहर की 2 और महिलाओ पर जानलेवा हमला करके अस्पताल पहुंचाया है लेकिन प्रशासन आज तक बन्दरो पर नुकेल नंही कस पाया है। उल्लेखनीय है कि मंडी शहर में आजकल बन्दरो की तूती बोल रही है। बन्दरो ने शहर के लोगो का जीना हराम कर रखा है और पूरे मंडी शहर में बन्दरो की ही हकू मत है । बंदरों के आतंक से लोगों में रोष ही नहीं बल्कि डर का माहौल बना हुआ है और लोग इतने दुखी हो चुके है कि वे शहर को छोडऩे तक के मूड में है। हालांकि प्रशासन व सरकार बंदरों के आतंक को रोकने के लिए प्रयासरत है परंतु फिर भी ये स्कीमें कागजों में ही है। आलम यह है कि शहर में आदमी कम और बन्दर ज्यादा दिखाई देते है। शहर का शायद ही कोई छोर ऐसा हो जंहा बन्दरो की तूती न बोलती हो। शहर मे बढ़ रही बंदरों की तादाद से न केवल बच्चो बल्कि बूडा़े के साथ-साथ आम लोगों का जीना भी दूभर हो गया है और वे खोफ के साये में अपना जीवन बिताने को मजबूर है। आम आदमी आस्था के चलते इन्हें बजरंगबली का प्रतीक मानते हैं। जिसके चलते वो इन्हे मारते नंही है। ऐसा होने से इनकी तादाद लगातार बढ़ रही है। आये दिन इन बन्दरो के आंतक से बच्चे तो बच्चे बूढ़े भी घरो से बाहर निकलने से घबराने लगे है। बन्दरो की दहशत से नन्हे स्कूली बच्चे हर रोज स्कूल न जाने की जिद अपने मां बाप से करते है। हम आप को बता दे कि मंडी शहर में सबसे ज्यादा बन्दर पैलेस कालोनी में है और इसी कालोनी में इन्होने अपना अड्डा बनाया हुआ है। आज तक यह उत्पादी बन्दर कई लोगो को अपने नुकीले दातों से काट कर अस्पताल का रास्ता दिखा चुके है। लेकिन हैरानी की बात है कि प्रशासन इन उत्पाती बन्दरो का कोई ईलाज नंही कर पाया है। मंडी शहर में बन्दरो द्धारा राहगीरो पर झपट कर उनके हाथो से सामान छिनना कोई नई बात नंही है। आए दिन बन्दर राहगीरो को अपना शिकार बनाते आए है। माह का शायद ही कोई ऐसा दिन खाली जाता हो जब बन्दरो ने किसी शहरी को अपना निशाना न बनाया हो। गौरतलब है किउत्पाती बंदर अब आम शहरियों खासकर महिलाओं व बच्चों पर हमला करने लगे हैं। जिससे शहर में खौफ का माहौल है। शहर का चौराहा हो या स्कूल, गलियां या फिर गांव की सडक़े बंदर उत्पात मचाते रहते हैं। उत्पाती बंदरों ने जनता में अपना इतना आतंक बिठा दिया है कि लोग अपने घरों में कपड़े सुखाना या बाहर रखी अपनी चाीजों को सुरक्षित नहीं समझते । बंदर रसोई घरों के अंदर तक मार करने लगे हैं और वहां रखे सामान को तहत-नहस कर रहे हैं। यहीं नहीं यह उत्पाती बंदर लोगों के घरों के ऊपर छत्तों में रखी गई पीने के पानी की टंकियां के ढक्कन तोड़ कर उसमें घुस जाते है और सारा पीने का पानी खराब कर देते है। आज शहर की स्थिति ऐसी है कि पैलेस कालोनी के कैंटीन मार्ग व अस्पताल मार्ग पर आम आदमी का इस मार्ग पर कम दिखाई देना और बंदरों का अधिक दिखाई देना है। उत्पाती बंदर शहर के विभिन्न हिस्सों कालेज, स्कूल, बाजार व पंचवक्त्र मंदिर के सामने झुंडो में बैठे रहते हैं जिससे वहां से गुजरने से स्कूली छात्र-छात्राएं व लोग कतराते हैं। कोई राहगीर वहां से अकेला गुजरता है तो पूरे का पूरा झुंड उस पर टूट पड़ता है। ग्राीमण क्षेत्रों की बात की जाए तो किसानों द्वारा बोई गई फसल तहसनहस कर दी गई है। सन्याहड़ी, सकोर, बीजणी, छिपणू, बाड़ी गुमाणु व सैण मौहल्ला के सब्जी उत्पादकों की फसलें बंदरों ने तबाह कर दी हैं। लोगों ने सरकार व प्रशासन से शरारती बंदरों पर नुकेल कसने की मांगी की है।

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