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प्यार बलात्कार फिर शादी और अब धोखा

धर्मशाला( रवि पाण्डेय )

प्यार और शादी के झाँसे में आकर ना जाने अब तक कई लड़किओं की जिन्दगियाँ बर्बाद हो चुकी है। जो लड़किओं को प्यार और शादी का झांसा देकर उसकी जिन्दगी को तबाह कर देते है बावजूद इसके आज भी कई ऐसी लडकियाँ है,जो प्यार और शादी के झाँसे में आकर अपना सब कुछ गवाँ बैठती है और उसे होष तब आती है जब उसका घर-संसार सब लुट चूका होती है।दुनिया का कोई भी धर्म विवाह से पहले सेक्स की अनुमति नहीं देता है। प्यार का दूसरा नाम है विश्वास। किसी का प्यार तभी पाया जा सकता है जब आप उसके भरोसे के काबिल हों। जहां विश्वास नहीं वहां प्यार भी नहीं हो सकता। विश्वास ही प्यार की डोर को मजबूत करता है। इसलिए अगर आप किसी से प्यार करते हैं तो आपको उस पर विश्वास भी करना होगा। साथ ही उसका भरोसा कभी भी नहीं तोडना होगा। लेकिन अक्सर ये देखा गया है कि दोनों में से कोई एक साथी दूसरे साथी के साथ धोखा करता है जो दूसरे के दिल को दुखी करता है। धोखा एक ऎसा शब्द है जिससे सभी बचना चाहते हैं। धोखा देने से भले ही न हिचकिचाएं लेकिन धोखा खाने से जरूर बचना चाहते हैं।

जी हा कुछ  ऐसा ही हो रहा है काँगड़ा जिला के शाहपुर थाना अंतर्गत रहने वाली एक २४ साल की बालीक के साथ .शाहपुर का लड़का ज्वाली की लडकी ,दोनों मिलते  है एक निजी संस्थान में लड़की वहा सिविल की पढाई करने को गयी तो थी जरुर लेकिन वही पर कार्य करने वाले एक कर्मचारी से उसको प्यार हो गया प्यार भी समय के अनुसार परवान चढ़ता गया दोनों ने समाज की सारी बंधनों को तोड़ सारी मर्यादा को लाँघ एक दुसरे के हो गये लकिन लड़के के माता पिता को ये रिश्ता मंजूर नहीं था परिवार वालो ने लड़के की शादी कही और तय कर दी ,लडकी को ये बात नागवार गुजरी ,उसने इसशादी को रोकने की पुरी कोशिस की और उसने शाहपुर थाना में रेप केस दर्ज करवा दिया नतीजन लड़के की शादी जहा तय हुई थी वो शादी हो न पाई लड़के के परिवार वाले रेप केस हो जाने की वज़ह से आनन फानन में पीड़ित लडकी से चामुंडा माता मंदिर में शादी कर रेप केस से छुटकारा पा लिया

पूरा मामला २९ नवम्बर २०१३ का है शादी के बाद पीड़ित लडकी ने पुरे मामले पर होने वाले सुनवाई पर खुद रोक लगवा दी घर बस जाने की उम्मीद लिय पीडिता अब उस घर की बहु बन जाती है एक नई जिन्दगी की शुरुआत को ले कर खुस रहने वाली बहु ये नहीं जानती  थी की आगे उसके साथ जो होने वाला है वो और भी दुखदाई है जब कोई मर्द एक नारी के साथ बलात्कार करता है तो समाज यह भूल जाता है कि किसने बलात्कार किया. उसे सिर्फ यह याद रहता है कि किसका बलात्कार हुआ है. ऐसे में यदि बलात्कारी की शादी उसी नारी से कर दी जाए जिसका उसने बलात्कार किया था तो उस बलात्कारी को तमाम उम्र यही ताना सुनने को मिलता है कि उसकी पत्नी का बलात्कार हो चुका है या फिर उसके घर की इज्जत को भरे समाज में उतारा जा चुका है. जिसने मानसिक स्तर पर आघात पहुंचाया हो उसे हर दिन मानसिक रूप से टूटता हुआ देखना हर पीड़ित की ख्वाहिश होती है.हर संभव अपने पति के साथ रहने की उम्मीद ले कर हर बार मानो उसका ख्याल उसके दिल से निकलता जा रहा था और उसका पति हर बार एक नया बहाना बना कर उससे दूर जा रहा था ,हद तो तब हो गयी जब पीडिता को उसके पति ने नौकरी के बहाने ससुराल से दूर गग्गल में किराया के मकान ले जा कर छोड़कर कहीं चला गया दस दिनों के इंतजार के बाद भी जब उसका पति घर लौट कर नहीं आया तब आखिरकार पीडिता ने अपने ससुरालवालों पर दहेज़ में दस लाख रुपये मांगने और मारपीट कर घर से निकाल देने का मामला धर्मशाला एस पी महोदय के पास दर्ज कराया ,जिला प्रशासन ने गंभीरता से करवाई की ,हांलाकी  इस मामले पर किसी की गीरफ्तारी नहीं हुई और जिन पांच लोगों पर धारा ४९८ लगी थी सब ने अग्रिम जमानत ले ली ,लेकिन सवाल ये है की अब वो बहु अबला नारी करे भी तो क्या माननीय अदालत के सिवा उसके पास अब इंसाफ मांगने का कोंई रास्ता भी तो नहीं ,वो जाये भी तो कहा मन में फीर भी यही सवाल उठता है क्या यही प्यार है पुरुष प्रधान समाज अपने घर की बहू-बेटियों की इज्जत को घर की चारदिवारी में छुपा कर रखता है और अपने घर की चारदिवारी से बाहर की बहू-बेटियों की इज्जत को नीलाम करता है. यदि ऐसे में उस पुरुष प्रधान समाज से यह कहा जाए कि जिस नारी की इज्जत पूरे समाज में नीलाम की गई है उसे ही अब अपने घर की इज्जत बना ले तो यह एक बलात्कारी के लिए ऐसा थप्पड़ होगा जिसकी गूंज उसे पूरी जिन्दगी सुनाई पड़ेगी.

उपरोक्त दास्तां हर उस पीड़ित लड़की कि हो सकती है जिसे बलात्कार का शिकार बनाया गया हो. अनकही दर्दभरी कहानियों के पीछे कितनी सिसकियां होती हैं इसे जानने की कोशिश ये समाज कभी नहीं करता. व्यवस्था तो पूरी तरह संवेदनहीन है ही और दोस्त, रिश्तेदार भी रेप पीड़िता के लिए उत्पीड़क ही साबित होते हैं. समाज की निर्दयता की शिकार बेबस लड़की के जख्मों को मरहम कैसे लगे यह सोचना हर उस व्यक्ति का कर्तव्य है जो स्त्री को उसे पूरे सम्मान से जीने देने की वकालत करता है. का वादा किया था.

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