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पर्यावरण व उर्जा संरक्षण के लिए जरूरी है अक्षय उर्जा विकास : – हितेश कपूर

किसी भी देश के आर्थिक विकास में उर्जा का बहुत योगदान रहता है । बदलते औद्योगिक विकास के साथ-साथ उर्जा की मांग भी निरन्तर बढ़ती जा रही है जिसे पारम्परिक उर्जा स्त्रोतों से पूरा करना संभव नहीं है । निरन्तर बढ़ती हई जनसंख्या, औद्योगिकरण व रहन-सहन के स्तर में वृद्घि के कारण उर्जा की मांग इतनी बढ़ गयी है कि उसे पूरा करना बहुत कठिन हो गया है, उर्जा के पारम्परिक साधन जैसे कोयला, तेल व प्राकृतिक गैस दिन-प्रतिदिन कम होते जा रहें है । ऐसे में उर्जा के नवीनतम साधनों को अपनाने की नितांत आवश्यकता है इसलिए उर्जा संरक्षण के लिए अक्षय उर्जा विकास अनिवार्य है ।
गैर परम्परागत उर्जा के रूप में मुख्यत: सौर उर्जा, पवन उर्जा व जल उर्जा का उपयोग किया जा सकता है जिसमें सूर्य को उर्जा के मुख्य स्त्रोत के रूप में प्रयोग किया जा रहा है ।
विश्व की उर्जा की कुल जरूरत की 85 प्रतिशत की पूर्ति जीवाशम ईंधन द्वारा की जाती है जिसमें तेल, प्राकृतिक गैस तथा कोयला प्रमुख है यदि इन ईधनों की वर्तमान दर खपत जारी रहे तो कोयले के भण्डार लगभग 200 साल में तथा तेल के भण्डार लगभग 50 वर्षों में समाप्त हो जायेंगे । ऐसे परिदृश्य में अपारम्परिक उर्जा के दोहन से न केवल उर्जा की मांग पूरा करने में सहायता मिलेगी बल्कि पर्यावरण तथा वनों को भी सुरक्षित रखने में भी सहाययता मिलेगी ।
हिमाचल प्रदेश एक पहाड़ी राज्य है यहॉं बहुत अधिक ठंड होने के कारण घरों में प्रयोग की जाने वाली मूल बिजली का 50 प्रतिशत केवल पानी गर्म करने में खर्च होता है इसलिए बिजली के खर्च को कम करने व ईंधन की बचत करने के लिए प्रदेश में प्रचूर मात्रा में उपलब्ध धूप का भरपूर प्रयोग पानी गर्म करने के लिए सौर तापीय संयंत्र की स्थापना से किया जा सकता है ।हिमाचल प्रदेश में 90 प्रतिशत जनता गांवों में रहती है सर्दियों में घरों के गर्म रखने, पानी गर्म करने के लिए तापीय संयंत्र को आसानी से उपयोग किया जा सकता है जिससे पारम्परिक उर्जा स्त्रोतों पर न केवल निर्भरता कम होगी बल्कि इन प्राकृतिक स्त्रोंतों के उपयोग से हिमाचल क्षेत्र में वनों के संरक्षण में सहायता मिलेगी ।
हिम उर्जा विभाग द्वारा लोगों को सौर उर्जा संयंत्र अपनाने तथा इन से होने वाले लाभ की जानकारी समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करके दी जा रही है । इसी सम्बन्ध में आज भी हिम उर्जा विभाग द्वारा एक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया जिसमें जिला परिषद, पंचायत समिति के सदस्य, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा युवक मण्डल के सदस्यों ने भाग लिया । शिविर में वरिष्ठ परियोजना अधिकारी हिम उर्जा हितेश कपूर ने उपस्थित जन समूह को विभाग द्वारा उपलब्ध करवाये जा रहे सौर उर्जा संयंत्रों तथा उन पर सरकार द्वारा दिए जा रहे उपदान की विस्तृत जानकारी प्रदान की ।
हितेश कपूर ने बताया कि सौर जल तापीय बिजली बचाने को अत्युतम साधन है । यह न केवल उर्जा की बचत करता हैं अपितु पर्यावरण संरक्षण भी करता है तथा इसे स्थापित करना असान भी है । वर्तमान में जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय सौलर मिशन के अन्तर्गत इस प्रणाली पर 60 प्रतिशत उपदान दिया जा रहा है । 100 लीटर प्रतिदिन क्षमता वाली सौर जल तापीय प्रणाली को स्थापित करके प्रतिवर्ष 1500 यूनिट तक बिजली की बचत की जा सकती है तथा इस बचत के द्वारा ढेड़ से 2 वर्षांे में इसकी स्थापना पर हुए कुल व्यय की प्रतिपूर्ति हो जाती है । एक अन्य महत्वपूर्ण उपकरण सौर कुकर जो वर्ष में 2 से 3 गैस सीलेण्डर की बचत करता है ।ये उपकरण भी विभाग द्वारा 60 प्रतिशत उपदान पर उपलब्ध करवाया जा रहा है। इसकी विशेषता यह है कि इसमें पका भोजन पौष्टिक व स्वास्थ्य वर्धक होता है तथा इससे पर्यावाण प्रदूषित नहीं होता ।
उन्होंने बताया कि उर्जा की बचत के लिए विभाग द्वारा सोलर स्ट्रीट लाइट, कन्संट्रेटर, सौर पम्प आदि उपलब्ध करवाने के अतिरिक्त एक किलो बाट तक की सौर उर्जा प्लांट स्थापित करने हेतू भी उपदान दिया जा रहा है ।

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