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पत्नी की जिम्मेदारी उठाने से नहीं बच सकता पति

2014_11image_14_10_13271401011-llनई दिल्ली : घरेलू हिंसा के तहत मांगे गए गुजारे भत्ते के केस की सुनवाई के दौरान अगर किसी व्यक्ति को अपनी पत्नी से तलाक मिल जाता है तो उसके बावजूद भी वह अपनी पत्नी को गुजारा भत्ता देने की जिम्मेदारी से नहीं बच सकता है।
 अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्तय प्रमाचला ने यह आदेश इस मामले में महिला की तरफ से दायर अपील को स्वीकारते हुए दिया है। महिला ने मांग की थी कि उसके पति को निर्देश दिया जाए कि तलाक होने के बाद भी पूर्व में कोर्ट के दिए गए आदेश के तहत उसे अंतरिम गुजारा भत्ता दिलाया जाए।अदालत ने कहा कि जब महिला ने गुजारे भत्ते के लिए अर्जी दायर की थी, उस समय वह पति-पत्नी थे। ऐसे में मामले की सुनवाई के दौरान अगर उनका तलाक हो गया तो वह अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता है। इस मामले में महिला ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे गुजारा भत्ता दिलाने से मना कर दिया था। निचली अदालत ने कहा था कि महिला यह साबित नहीं कर पाई कि उसका अपने पति के साथ घरेलू संबंध है। परंतु सेशन कोर्ट ने उस आदेश को रद्द करते हुए कहा कि महिला के पति ने उसे अंतरिम गुजारा  भत्ता नहीं दिया। जो कि एक आर्थिक प्रताडऩा है।
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