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नेताजी के स्टॉपेज पर अब नहीं रुकेगी ट्रेन

नई दिल्ली—रेल मंत्री सदानंद गौड़ा ने रेल बजट पेश करते हुए अपने भाषण में कहा था कि ट्रेनों के स्टॉपेज की समीक्षा होगी और कुछ स्टॉपेज खत्म किए जा सकते हैं। अब यह साफ हो गया है कि रेल मंत्रालय ने ऐसे 1250 स्टॉपेज को सितंबर से खत्म करने का फैसला किया है। ये सभी स्टॉपेज स्थानीय सांसदों के दबाव पर शुरू किए गए थे, लेकिन रेलवे को इसकी वजह से सालाना 300 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। स्थानीय सांसदों के दबाव में ट्रेन के स्टॉपेज में बढ़ोतरी अब तक आम बात रही है। इस वजह से सफर तो लंबा होता ही है, साथ में रेलवे को रोजाना करोड़ों की चपत लगती है। फंड की कमी से जूझ रहे रेलवे के एक आंतरिक सर्वे में पता चला है कि एक स्टॉपेज पर ट्रेन के रुकने पर ईंधन और दूसरे आपरेशनल खर्च करीब आठ हजार रुपए का है, जबकि इस तरह के हर स्टॉपेज से औसतन आमदनी 500 रुपए की हो रही है। नेताओं के दबाव में देश भर में करीब 2400 स्टॉपेज बनाए गए हैं। इनकी समीक्षा के बाद रेलवे ने पाया कि इनमें से 1250 स्टॉपेज व्यावसायिक रूप से अवांछित और अव्यावहारिक हैं। बिहार और केरल में इस तरह के ट्रेन स्टॉपेज की संख्या सबसे  ज्यादा है। रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि ये स्टॉपेज ‘साइलेंट किलर’ हैं। हालांकि, घाटे में रहने के बावजूद कुछ स्टॉपेज सामाजिक जरूरत की वजह से बनाए रखे जाएंगे। इन स्टॉपेज की शुरुआत स्थानीय सांसदों द्वारा जनता की मांग पर रेलवे से की गई सिफारिश के आधार पर की गई थी। इनमें से ज्यादातर अब सांसद नहीं हैं और कई इस पर सहमति दे चुके हैं कि वांछित टिकट नहीं बिकते हैं तो स्टॉपेज खत्म कर दिए जाएं। रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि कई नेता अपने पसंदीदा स्टेशन पर ट्रेन रुकवाने को प्रभाव से जोड़कर देखते हैं।

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