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धर्मशाला में गुलेरी जयंती समारोह हर्षोल्लास से आयोजित इनकी कहानी “उसने कहा था” पर हिंदी में फीचर फिल्म का निर्माण हुआ -मुख्य कलाकार थे सुनील दत्त

धर्मशाला,(अरविन्द शर्मा) 07 जुलाईः भाषा एवं संस्कृति विभाग के सौजन्य से रविवार को यहां बचत भवन में पंडित चन्द्रधर शर्मा गुलेरी का जयंती समारोह बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। समारोह का शुभारंभ विशिष्ट अतिथि पुलिस उप-अधीक्षक धर्मशाला, श्री मनोज जोशी और निदेशक भाषा एवं संस्कृति विभाग, डा0 देवेन्द्र गुप्ता ने दीप प्रज्जवलित कर किया जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार, डा0 गौतम व्यथित द्वारा की गई।
डा0 देवेंद्र गुप्ता ने समारोह में विभिन्न क्षेत्रों से आए सभी आमंत्रित विद्वानों का अभिनन्दन करते हुए कहा कि पंडित चन्द्रधर शर्मा गुलेरी हिन्दी साहित्य के प्रकांड विद्वान थे। सन् 1915 को सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित ‘‘उसने कहा था’’ कहानी को तत्कालीन समालोचकों ने उस युग की आधुनिक कहानी माना था। उन्होंने कहा कि पंडित चन्द्रधर शर्मा गुलेरी ने भाषा, साहित्य एवं पुरातत्व आदि के क्षेत्र में अनुसंधानपर्क कार्य किए। उन्होंने कहा कि गुलेरी द्वारा रचित पहली कहानी ‘‘सुखमय जीवन’’ मानी जाती है।

काँगड़ा जिला के गुलेर से सम्बन्ध रखनेवाले चंदर धर शर्मा गुलेरी का जन्म 7 जुलाई 1883, पुरानी बस्तीए जयपुरए राजस्थान में हुआ I

 

उन्होंने अपना साहित्य हिंदीए संस्कृत तथा अंग्रेजीभाषाओं में रचा एजिसमे कहानीए निबंधए व्यंग्यए कविताए आलोचनाए संस्मरण शामिल है I

गुलेरी जी हिंदी के अतिविशिष्ट कथाकार हैं। इनकी कहानी “उसने कहा था” की गणना हिंदी की महानतम कहानियों में की जाती है, जिस पर हिंदी में फीचर फिल्म का निर्माण भी हुआ iइस फिल्म के मुख्य कलाकार सुनील दत्त थे ।

गुलेरी जी बहुमुखी रुचियों और प्रतिभा के व्यक्ति थे। उनका कार्यक्षेत्र खगोल विज्ञानए ज्योतिषए धर्मए भाषा विज्ञान, इतिहास, शोध, आलोचना आदि अनेक दिशाओं में फैला हुआ था। जयपुर वेधशाला के यंत्रों पर लगे जीर्णोद्धार तथा शोधकार्य विषय शिलालेखों पर ष्चंद्रधर गुलेरी नाम भी खुदा हुआ है। वह कुछ समय तक काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्राच्य विभाग में प्राचार्य भी रहे।

 

चन्द्र धर गुलेरी का निधन 12 सितंबर 1922ए को बनारस में हुआ 

इस राज्य स्तरीय समारोह के प्रथम सत्र में डा0 ओम प्रकाश सारस्वत द्वारा श्री चन्द्रधर शर्मा गुलेरी के निबंध इतिहास दृष्टि और सम्प्रत्यय, श्री सुदर्शन विशिष्ट द्वारा पंडित चन्द्रधर शर्मा गुलेरी का कथा संसार, एक विवेचन तथा डा0 प्रत्यूष गुलेरी द्वारा पंडित चन्द्रधर शर्मा गुलेरी संस्मरण और जीवनशैली नामक तीन आलेख पत्र पढ़े गए। इन शोध-पत्रों के माध्यम से गुलेरी जी के निबंधों, कहानियों, संस्मरण और जीवनशैली पर इन विद्वानों ने सारगर्भित प्रस्तुत की। इन आलेखों पर आमंत्रित विद्वानों से परिचर्चा भी करवाई गई। समीक्षा में आलोचकों ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए। परिचर्चा में रेखा डढवाल, त्रिलोक मेहरा, सुदर्शन भाटिया, पीयूष गुलेरी, कृष्ण महादेविया, रत्न चंद निरझर, मदन हिमाचली, जयदेव विद्रोही, राघव गुलेरिया आदि ने भाग लिया।


इस समारोह में विद्वानों द्वारा पंडित चन्द्रधर शर्मा गुलेरी के साहित्य को प्रकाशित करवाने तथा पाठ्यक्रम में कहानियां, निबंध पाठ्यक्रम में शामिल करवाने के निदेशक, भाषा एवं संस्कृति से मांग रखी। इस पर डा0 देवेंद्र गुप्ता ने कहा कि गुलेरी के निबंधों पर विभाग और अकादमी कुछ नया कार्य सम्पन्न करवाकर उसे प्रकाशित करवाया जाएगा।
डा0 देवेंद्र गुप्ता ने विद्वानों को आश्वासन दिया कि गुलेरी जी का साहित्य पाठ्यक्रम में शामिल करवाने के प्रस्ताव के प्रारूप को निदेशक, शिक्षा विभाग के साथ प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा ताकि विद्यार्थियों को गुलेरी के साहित्य को पढ़ने एवं जानकारी हासिल करने का अवसर प्राप्त हो।
इस समारोह के दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें राज्य के विभिन्न भागों से आए कवियों ने भाग लिया।

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