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धर्मशाला के विकास में रोड़ा बन गया बस अड्डा

धर्मशाला — अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान बना चुका धर्मशाला शहर नित नई बुलंदियों को छू रहा है। तेजी से विकसित होती मिनी राजधानी में अभी भी कई खामियां ऐसी है, जिन्हें दूर करने की जरूरत है।  धर्मशाला बस स्टैंड की अनदेखी पर्यटन विकास व स्वरोजगार सहित ट्रांसपोर्टरों को भी नुकसान पहुंचाने लगी है। पर्यटन नगरी के बस अड्डे की ओर सरकार ध्यान दे तो क्षेत्रवासियों को स्वरोजगार व पर्यटक विकास में मदद मिलेगी और मेहमानों को आधुनिक सुविधाएं। धर्मशाला बस स्टैंड को कोतवाली बाजार से जोड़ कर इसे रिज मैदान से जोड़ने की विभिन्न वर्गों ने पैरवी करते हुए इस ओर विशेष ध्यान देने की मांग उठाई है। अनदेखी के चलते जहां अवैध कब्जे बढ़ने लगे हैं, वहीं पर भू-स्खलन से भी बस अड्डे का एंट्री प्वाइंट प्रभावित हो रहा है। इतना ही नहीं इंटर स्टेट बस स्टैंड में न तो वहां पहुंचने वाली सारी बसों को स्थान मिल पाता है और न यात्रियों को आधुनिक सुविधा, जिससे सरकार के पर्यटन विकास के दावों की पोल खुलती है। विभिन्न राज्यों से बसें धर्मशाला पहुंचती हैं और धर्मशाला की बसें दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों को जाती हैं। हर दिन हजारों यात्रियों के आने और जाने का गवाह बनने के बावजूद इस इंटर स्टेट बस स्टैंड की हालत देख कर हर कोई हैरान रह जाता है। पर्यटन विकास सहित अन्य कई तरह के दाबे सरकारें करती हैं, लेकिन देशी-विदेशी मेहमानों से भरे रहने वाले बस अड्डे में आधुनिक सुविधाओं के नाम पर यात्रियों को कुछ नहीं मिल पाता है। बरसात के दिनों में तो बस स्टैंड के आस पास पसरी गंदगी से बने माहौल के कारण यात्री बस अड्डे में जाना ही पसंद नहीं करते हैं। पीने के पानी, बैठने की सुविधा और शौचालय से लेकर हर तरफ असुविधा का आलम है। बस अड्डे के एंट्री प्वाइंट पर ही पिछले चार सालों से ल्हासा गिर रहा है। जो बरसात में आने जाने वाले यात्रियों के लिए आफत बना रहता है और सूखे मौसम में इसकी धूल वहां से गुजरने वालों को परेशान करती  है। इन सारे हालात को देखते हुए क्षेत्र के व्यापारी वर्ग, कर्मचारी वर्ग, बस आपरेटरों, टैक्सी आपरेटरों और बृद्धिजीवी वर्ग ने सरकार से मांग उठाई है कि इस स्थल के महत्त्व और पर्यटकों की आवाजाही को देखते हुए इस बस स्टैंड को विकसित कर कोतवाली बाजार से जोड़ा जाए, जिससे यहां आधुनिक बस स्टैंड, टैक्सी स्टैंड, शौचालय, भोजनालय और खरीदादारी करने के लिए माल आदि भी बनाए जा सकें। इतना ही नहीं इसे कोतवाली बाजार से जोड़ते हुए शिमला के रिज मैदान की तर्ज पर डिवेलप किया जाए, जिससे स्वरोजगार के भी अनेक अवसर सृजित होंगे।

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