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दूषित पेयजल ने बढ़ाई मंडीवासियों की दिक्कत

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मंडी, 12 अप्रैल – दूषित पेयजल ने मंडीवासियों की दिक्कतें बढ़ा दी हैं। आइजीएससी शिमला की लैब रिपोर्ट में दूषित पेयजल से पीलिया फैलने का पता चलने के बावजूद शहरवासी चौकस नहीं हैं। मंडी के निवासी नगर परिषद की मनाही के बावजूद बावडि़यों से पानी पी रहे हैं। स्वास्थ्य दृष्टि से बावड़ियों का पेयजल अभी शुद्ध नहीं है। स्वास्थ्य विभाग, सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य (आइपीएच) विभाग और नगर परिषद मंडी की टीम ने बावड़ियों की साफ-सफाई व क्लोरोनेशन तो की है मगर अभी तक पेयजल को शुद्ध नहीं माना गया है। इस कारण नगर परिषद ने दूषित बावड़ियों के बाहर पानी न भरने के चेतावनी बोर्ड लगाए हैं। इसके बावजूद लोग दूषित बावड़ियों से पानी भर रहे हैं। रोक के बाद भी दूषित पेयजल से अब दोबारा पीलिया बढ़ने का खतरा उत्पन्न हो सकता है। नगर परिषद की चेतावनी को हल्के में लेना अब शहरवासियों को महंगा साबित हो सकता है। जिला में मंडी शहर से ही पीलिया फैलने की शुरुआत हुई थी। अब मंडी शहर में स्थिति काबू में हैं मगर शहरवासियों की लापरवाही से अब दोबारा पीलिया के मामले बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की मानें तो दूषित पेयजल पीने के बाद पीलिया 10 से 50 दिन तक सामने आ सकता है। कुछ मामलों में यह 10 दिन में सामने आ जाता है। कुछ मामलों में 50 दिन भी लग जाते हैं। वहीं, दूषित जल पीने वाले रोगियों में अब यह रोग दोबारा पनप कर पीलिया का कहर बरपा सकता है। उक्त बावडि़यों के पेयजल सैंपल जांच के दौरान फेल पाए गए हैं। पेयजल शुद्धता को लेकर नगर परिषद अब दोबारा पेयजल जांच करवा रही है जिसमें बावड़ी के पानी शुद्ध या दूषित होने का पता चलेगा। इसके बाद ही शुद्ध पानी बावड़ी से भरा जा सकेगा।

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