October 22, 2017

दिल्ली विधानसभा भंग, 9 महीनों में तय की ये 10 अड़चनें

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नई दिल्ली: केंद्रीय कैबिनेट ने दिल्ली में विधानसभा भंग करने को मंजुरी दे दी है। कैबिनेट की मंजुरी के बाद दिल्ली में विधानसभा चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने मंगलवार सुबह ही विधानसभा भंग करने की सिफारिश राष्ट्रपति को भेज दी थी। इस सिफारिश को राष्ट्रपति ने कैबिनेट को रेफर किया। दिल्ली में चुनाव का फैसला करने से पहले पिछले 9 महीने में 10 बड़े पड़ाव पार करने पड़े।

कौन से थे 9 कदम आइए जानें-


14 फरवरी- दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया। 
17 फरवरी- दिल्ली में राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति शासन लगाया।
4 जुलाई- दिल्ली विधानसभा को भंग करने की आम आदमी पार्टी की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक बैंच को रेफर किया।
6 अगस्त- सुप्रीम कोर्ट की संविधान बैंच ने केंद्र को दिल्ली में विधानसभा भंग करने की दिशा में काम करना का आदेश दिया। 
9 सितंबर- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मामले में 1 महीने में हल निकालने को कहा।
10 अक्टूबर- केंद्र की तरफ से सॉलिस्टर जनरल अदालत में पेश हुए सरकार के गठन के बारे में अदालत को बताने के लिए दिवाली के बाद का वक्त मांगा।
28 अक्टूबर- सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को 30 अक्टूबर तक स्थगित किया।
30 अक्टूबर- सुप्रीम कोर्ट ने यूपी राज्यपाल को 12 दिन में भाजपा का पक्ष जानने को कहा, सुनवाई की तारिख 11 नवंबर को रखी गई।
4 नवंबर- एलजी ने रिपोर्ट राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भेजी, राष्ट्रपति ने इसे कैबिनेट को भेजा, कैबिनेट द्वारा विधानसभा भंग करने को मंजुरी।

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