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तारा मंदिर कांगड़ा में 10 अक्तूबर से आरंभ होगी सर्वोजोनिन दुर्गा पूजा

धर्मशाला, 7 अक्तूबर: प्रतिवर्ष की भांति तारा मंदिर कांगड़ा में इस वर्ष भी सर्वोजोनिन दुर्गा पूजा 10 अक्तूबर से आयोजित की जा रही है। यह जानकारी देते हुये प्रचार सदस्य एलके घोष ने बताया कि यह पूजा 14 अक्तूबर चलेगी, जिस दिन महादशमी के पर्व पर दुर्गा माता की प्रतिमा का बनेर खड्ड कांगड़ा में विसर्जन किया जायेगा।
उन्होंने कहा कि शिमला की 102 वर्षीय कालीबाड़ी पूजा के बाद यह प्रदेश की दूसरी सर्वाधिक पुरानी पूजा है। उन्होंने बताया कि इस पूजा की यह विशेषता है कि यह पहली नवरात्रि सेे आरंभ न होकर छठे नवरात्रे को आरंभ होती है। 1967 में योल छावनी में भारतीय सेना में कार्यरत बंगाली श्रद्धालुओं में अपने नैसर्गिक अनुष्ठानिक वातावरण उत्पन्न करने के लिए तारा मंदिर में पूजा का आरंभ हुआ। तारा मंदिर के मुख्य पुजारी स्वामी एएस ब्रह्मचारी ने बताया कि इस मंदिर में यह पूजा पिछले 45 वर्षों से आयोजित की जा रही है। दुर्गा, जिन्हें शक्ति एवं अध्यात्म की प्रधान देवी कहा जाता है, की पूजा उनके भक्तों द्वारा मानव जाति के कल्याण एवं सही पथ पर चलने की प्रेरणा प्राप्त करने के उद्देश्य से की जाती है।
उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल के सुप्रसिद्ध कलाकार कमल पाॅल पिछले 20 सालों से अपने बेटे शुभांकर चित्रकार के साथ महिषासुर मर्दिनी, उनकी पुत्रियों लक्ष्मी एवं सरस्वती तथा पुत्रों कार्तिक तथा गणेश की मूर्तियां को परम्परानुसार बनाते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 18 अक्तूबर को तारा माता पूजा के बाद सामूहिक भोज या जग का आयोजन भी किया जायेगा।

 

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