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ट्रैक पर सड़ रही रेलवे की वन संपदा

himachal pradesh news kangraपंचरुखी — रेलवे विभाग की वन संपदा किस तरह गल-सड़ रही है। इसका उदाहरण पंचरुखी-पपरोला टै्रक पर देखा जा सकता है। यहां बेशकीमती पेड़ गिर कर टै्रक के साथ ही वर्षों से गल-सड़ रहे हैं, न तो रेल महकमा इसके लिए संजीदा है, न ही स्थानीय प्रशासन इस बाबत कभी गंभीर दिखा। इसके अलावा उक्त मार्ग पर दर्जनों पेड़ उखड़ कर गिर गए, लेकिन विभाग की लकड़ी या तो सड़ रही है या लोगों द्वारा गायब कर दी गई। यही नहीं, हाल ही में स्टेशन से एक पेड़ काटा गया व उसे अज्ञात लोग लेकर चलते बने, लेकिन विभाग ने जानते हुए कार्रवाई नहीं की व हजारों की लकड़ी गायब हो रही है व विभाग चिरनिद्रा सोया हुआ है। उधर, पंचरुखी-पपरोला रेल मार्ग पर आवा खड्ड के पुल के साथ दर्जनों पापुलर के पेड़ सूखे खड़े हैं, जो मार्ग को अवरुद्ध कर सकते हैं। विभाग इन्हें कटवाने की जहमत नहीं उठा रहा है, जबकि लोग सायं ढलते ही स्वयं इन्हें काट कर ले जाते हैं। अब तक हजारों की लकड़ी यूं ही चोरी हो रही है, लेकिन विभाग को इसकी परवाह नहीं है। हालांकि विभागीय अधिकारी यह कहते सुने जा सकते हैं कि इस लकड़ी से कितना पैसा होगा, लेकिन वह यह नहीं जानते है कि बूंद-बूंद से घड़ा भरता है, अगर विभाग शुरुआत करे तो इस समय कांगड़ा रेल को नया इंजन इन्हीं पैसों से मिल सकता है। इस विषय में स्टेशन मास्टर शीला देवी कहती हैं कि वह इस विषय में कुछ नहीं कह सकतीं, क्योंकि यह उनके कार्यक्षेत्र में नहीं है। इस संदर्भ में विभागीय अधिकारी एन गोपाल का कहना है कि वह इस विषय में कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। उच्च अधिकारी ही इसकी जानकारी दे सकते हैं।

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