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टमाटर पहुंचा 45 पार

सैंज —  देश के बड़े राज्यों में बरसात आने के बाद कुल्लू जिला में पैदा किए जाने वाले टमाटर की मांग एकाएक बढ़ गई है। लाल सोने के नाम से प्रसिद्व टमाटर के रेट में भारी उछाल आ गया है। हाफ सेंचुरी मारने को तत्पर टमाटर ने प्रदेश में पहली बार पिछले 72 सालों का रिकार्ड तोड़ दिया है। मंगलवार को कुल्लू व मंडी जिला की तमाम सब्जी मंडियों में तेजी का रुख रहा और संभावना जताई जा रही है कि एक दो दिन में टमाटर के रेट आसमान छू सकते हैं। सब्जी मंडी टकोली, लारजी और भुंतर में किसानों के चेहरों पर मुस्कान देखी गई। विपणन बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि ग्लोवल वार्मिंग के कारण मौसम में तेजी से बदलाव हो रहा है, उससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था, लेकिन मार्केट में आई तेजी से अब सब्जी उत्पादक मालामाल हो गए हैं। सर्वप्रथम टमाटर की खेती वर्ष 1942 में सोलन जिला में हुई। कृषि विभाग के रिकार्ड के अनुसार सोलन के प्रगतिशील किसानों ने टमाटर की खेती को आय का मुख्य स्रोत मानते हुए अपनी आर्थिकी में सुधार किया है। सोलन जिला के किसानों के क्रांतिकारी परिवर्तन देखतु हुए कुल्लू मंडी के ग्रामीणों ने भी 80 के दशक में टमाटर की खेती शुरू की, जिससे किसानों का भविष्य संवरने लगा। किसानों का कहना है कि उन्हें पहली बार टमाटर के दामों के अधिक रेट मिल रहे हैं। उधर, इस बारे में प्रदेश विपणन बोर्ड कुल्लू के सचिव प्रकाश कश्यप का कहना है कि टमाटर उत्पादक राज्यों में कम उपज के करण रेट में इजाफा हुआ है, वैसे भी राज्य विपणन बोर्ड किसानों को उपज के अच्छे दाम दिलवाने के लिए तत्पर है।

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