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जैविक खेती की ओर अग्रसर कुल्लू के किसान, कृषि विभाग जैविक खेती के लिए दे रहा है सब्सिडी

कुल्लू 18 जुलाई : रासायनिक खादों व अन्य रसायनों के बढ़ते दुष्प्रभावों के चलते कृषि विभाग कुल्लू जिला में जैविक खेती को बढ़ावा दे रहा है। इस ओर प्रदेश व केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाएं विभाग के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही हैं। कुल्लू के किसान भी इन योजनाओं के माध्यम से जैविक खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं। जैविक खेती से तैयार किए गए उत्पादों को बाजार में कई गुणा अधिक दाम मिलने से कुल्लू जिला के किसान जैविक खेती को अपना रहे हैं।
जिला कुल्लू में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना व मैक्रो मैनेजमैंट आॅफ एग्रीकल्चर योजना के अंतर्गत वर्ष 2010-11 में 2950, वर्ष 2011-12 में 2402 तथा वर्ष 2012-13 में 331 केंचुआ खाद यूनिटों का निर्माण करवाया जा चुका है।
इसके अतिरिक्त 2011-12 में 480 वर्मीबैड तथा 2012-13 में 1300 वर्मीबैड किसानों के खेतों में लगवाए गए। कृषि उपनिदेशक बीएल शर्मा ने बताया कि जिले में वर्ष 2009-10 से अब तक कुल 1027 कृषकों को जैविक खेती के लिए पंजीकृत किया जा चुका है। इस समय जिले में लगभग 800 हैक्टेयर भूमि पर जैविक खेती की जा रही है। वर्ष 2012-13 से आगामी तीन वर्षों में लगभग पचास हैक्टेयर अतिरिक्त भूमि को जैविक खेती के अधीन लाने का लक्ष्य रखा गया है।
तृतीय वर्ष में इस क्षेत्र वाले किसानों का प्रमाणीकरण किया जाएगा। शर्मा ने बताया कि इस समय किसानों को वर्मी कंपोस्ट पिट के लिए चार हजार रूपये की सब्सिडी दी जा रही है। इस सब्सिडी से किसान वर्मी कंपोस्ट पिट का निर्माण करके जैविक खेती आरंभ कर सकते हैं। जैविक खाद से तैयार उत्पादों को बाजार में तीन गुणा अधिक दाम मिल सकते हैं। इससे किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं और प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का भागेदारी और बढ़ सकती है।

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