Header ad
Header ad
Header ad

जिला में हुआ पैंटावैलंेट वैक्सीन का शुभांरभ

asधर्मशाला, 18 सितम्बर: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के तत्वाधान में आज
क्षेत्रीय अस्पताल, धर्मशाला के मातृ-शिशु स्वास्थ्य केन्द्र में पैंटावैलेंट
वैक्सीन का शुभांरभ किया गया। इस अभियान की शुरूआत विभाग के संयुक्त निदेशक
डॉ0 अजय गुप्ता और डॉ0 बीएम गुप्ता की उपस्थिति में हुई।
     मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0 बीएम गुप्ता ने इस अवसर पर प्रतिभागियों को
बताया कि  कि हिमोफिल्स इनफ्लुएंजा टाईप बी (हिब) छः प्रकार का बिमारियों का
बैक्टीरिया होता है और तकरीबन सभी प्रकार की खतरनाक या घातक बीमारियों की वजह
बनता है। भारत में प्रति वर्ष इसके करीब 30 लाख गम्भीर मामले सामने आते हैं,
जिससे 72 हजार बच्चों मौत के आगो्य में समा जाते हैं। करीब 30 प्रतिशत बच्चे,
जो भले ही दिमागी बुखार से छुटकारा पा लेते हैं, को बहरेपन, अधरंग और मानसिक
पिछड़ेपन जैसी स्थायी शारीरिक अक्षमता का शिकार होना पड़ता है। कई दे्य, जिनमें
अमेरिका और यूरोप शामिल हैं,  में 1990 के दशक में हिब वैक्सीन को राष्ट्रीय
टीकाकरण में शामिल किया गया था।     विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष, 2006 में
सभी दे्यों के राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रमों में हिब वैक्सीन को शामिल किया।
आज विश्व के 180 से अधिक देश अपने राष्ट्रीय कार्यक्रम में पैंटावैलेंट
वैक्सीन को शामिल कर चुके हैं।
     उन्होंने बताया कि इससे पूर्व राष्ट्रीय टीकाकरण सूची में छठे, 10वें और
14वें सप्ताहों में नौनिहालों को पहले चार बीमारियों से बचाव के लिए छः टीके
लगाए जाते थे, परन्तु पैंटावैलेंट वैक्सीन को शामिल किए जाने के बाद अब
बच्चांे को पांच बीमारियों के लिए मात्र तीन टीके लगाए जाएंगे।
     जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ0 चित्रा कौशल ने बताया कि भारत में लिक्वड
पैंटावैलेंट वैक्सीन आरम्भ की गई है, जिसमें हिमोफिल्स इनफ्लुएंजा टाईप बी
(हिब) के अतिरिक्त वैक्सीन शामिल की गई है। इससे एक तिमाही से अधिक निमोनिया
या 90 प्रतिशत से अधिक एचआईबी दिमागी बुखार के मामलों को रोकने में मदद
मिलेगी। भारत में एक से 59 महीनों के बच्चों की मौत का कारण निमोनिया होता है,
जो करीब 16 प्रतिशत है जबकि दूसरा बड़ा कारण डायरिया है, जो करीब 13 प्रतिशत
है।
     इससे पूर्व जिला के चिकित्सा अधिकारी डॉ0 राजेश गुलेरी ने मुख्य अतिथि का
स्वागत करते हुए बताया कि पैंटावैलेंट वैैक्सीन पांच तरह की वैक्सीन का संयोजन
है, जिससे बच्चे को डिपथीरिया, टेटनस, गलघोटू, हैपेटाइटिस बी तथा हिमोफिल्स
इनफ्लुएंजा टाईप बी से बचाने में मदद मिलेगी। पैंटावैलेंट वैक्सीन को वैश्विक
टीकाकरण कार्यक्रम शामिल किया गया है और यह कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं है बल्कि
यह वर्तमान डीटीपी और हेपेटाइटिस बी वैक्सीन परिवर्तन मात्र है।
    इस अवसर पर वरिष्ठ मेडिकल अधीक्षक डॉ0 आरएस राणा, कांगड़ा के सभी बीएमओ तथा
एसएमओ उपस्थित थे।
Share

About The Author

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Please Solve it * *

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)