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जिया-बड़सर में होगी जैविक खेती

IMG_20141119_145208-300x190पालमपुर —  जैविक खेती के लिए कृषि विभाग और कॉमसन एग्रो द्वारा प्रदेश भर में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में पीपीपी मोड पर पालमपुर उपमंडल के जिया और बड़सर क्षेत्र का चयन किया गया है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में दोनों पंचायतों के कुल 826 एकड़ में से 20 एकड़ भूमि पर गेहूं की बिजाई से कटाई वैज्ञानिक देख-रेख में पूरी तरह जैविक रूप से की जाएगी। यह प्रोजेक्ट सरकार और कंपनी द्वारा 70ः30 के अनुपात में संचालित किया जा रहा है। इसमें जैविक खाद और कीटनाशकों के प्रयोग से मिट्टी के उपजाऊपन पर अनुसंधान किया जाएगा। इस दौरान किसानों से जैविक खाद और परंपरागत दोनों ही रूप में खेती करवा कर उत्पादन के अंतर पर अध्ययन किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट में किसानों को जैविक खाद इत्यादि किसानों को कंपनी द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही है। फसलों में पूरी तरह रासायनिक खादों और कीटनाशकों का उपयोग समाप्त करके जैविक खाद एवं कीटनाशकों से उसी अनुपात में उत्पादन प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत प्रदेश में कांगड़ा जिला के जिया बड़सर क्षेत्र में की गई है और इसके सार्थक परिणाम आने पर चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में इसे लागू करने की योजना है। इस प्राजेक्ट में 102 किसानों को शामिल कर 20 एकड़ भूमि में जैविक खेती के लिए चयनित कर गेहूं की बिजाई की जा रही है। प्रदेश में रासायनिक कीटनाशक मुक्त खेती कि ओर किसानों को प्रेरित करने के लिए यह प्रोजेक्ट जिला कांगड़ा के तीन विकास खण्डों भवारना, सुलाह स्थित भेडू महादेव और नगरोटा बगवां के 20 एकड़ क्षेत्र में आलू की फसल पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में भी किया जा रहा है। आत्मा के प्रोजेक्ट निदेशक रिपन सूद ने बताया कि पीपीपी मोड पर यह परियोजना पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आरंभ की गई है।

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