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चावल उत्पादन में कांगड़ा जिला अग्रणी, 65 हजार मीट्रिक टन धान उत्पादित होगा कांगड़ा में

धर्मशाला, 4 जुलाई- ‘‘ भोजन में यदि चावल न हो तो भोजन के स्वाद एवं भरपूर आनंद में कमी रह जाती है ’’। प्रदेश में कांगड़ा जिला चावल उत्पादन में अग्रणी माना जाता है। जिला में धान की खेती प्रमुख फसलों में से एक है। इस वर्ष बारिश समय पर होने से धान की रोपाई का कार्य इन दिनों प्रगति पर है। किसान चिलचिलाती धूप व बारिश में अपने क्यारों को समतल (मच्च) करने एवं धान की रोपाई करने में व्यस्त हैं।
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिला में लगभग 99 हजार हैक्टेयर कृषि योग्य भूमि में से 37 हजार हैक्टेयर भूमि, अर्थात एक तिहाई हिस्से पर धान की पैदावार की जाती है। जिला के विकास खंड भवारना, नगरोटा बगवां, नूरपुर, फतेहपुर, बैजनाथ क्षेत्र में सर्वाधिक धान की खेती की जाती है और धान की फसल का अच्छा उत्पादन होने से अधिकांश लोगों को चावल बाजार से नहीं खरीदने की आवश्यकता नहीं रहती बल्कि किसान अपने खेतों में उत्पादित पौष्टिक चावल से वर्ष भर गुजारा करते हैं।
जिला में इस वर्ष 36700 हैक्टेयर भूमि में 65 हजार मीट्रिक टन धान उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है जबकि गत वर्ष के दौरान जिला में 64 हजार मीट्रिक टन धान का उत्पादन दर्ज किया गया। जिला में धान की खेती को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत 750 हैक्टेयर भूमि पर धान की खेती के लिए प्रदर्शन प्लाॅट चिन्ह्ति किए गए हैं जिसमें रोपाई और सीधी बिजाई विधि से धान उत्पादित किया जा रहा है जबकि अन्य किसानों को 50 प्रतिशत उपदान पर कृषि विभाग द्वारा 1350 क्विंटल उन्नत किस्म धान का बीज उपलब्ध करवाया गया है जिसमें 870 क्विंटल एचपीआर-1068 किस्म तथा 372 क्विंटल एचपीआर-2143 किस्म शामिल है। इसके अतिरिक्त जिला में कस्तूरी बासमती का उत्पादन भी किसानों द्वारा किया जाता है।

कृषि विभाग के प्रवक्ता के अनुसार जिला में किसानों को धान की हाईब्रिड किस्मों का बीज लगाने के लिए पे्ररित किया जा रहा है तथा किसानों को हाईब्रिड धान की रोपाई ‘‘श्री विधि’’ से करने की सलाह दी जा रही है क्योंकि श्री विधि द्वारा एक हैक्टेयर क्षेत्र में केवल 6-8 किलोग्राम बीज की खपत होती है और साधारण विधि से धान की एचपीआर-2143 तथा एचपीआर-1068 किस्म की रोपाई करने का एक हैक्टेयर में 35 से 40 क्विंटल तथा श्री विधि से रोपाई करने से 50 से 60 क्विंटल धान उत्पादित होता है जबकि हाईब्रिड धान से श्री विधि द्वारा 60 से 70 क्विंटल प्रति हैक्टेयर ऊपज पैदा की जा सकती है।
वैज्ञानिक ढंग से धान की खेती करने पर जिला में हर वर्ष धान उत्पादन में बढ़ौतरी हो रही है। किसानों को कृषि की नई तकनीक जानकारी देने के लिए कृषि विभाग एवं चैधरी श्रवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों का काफी योगदान रहा है और किसानों द्वारा कृषि को एक व्यवसाय के रूप में अपनाने से किसानों की आर्थिकी में क्रांतिकारी परिवर्तन देखने का मिला है।

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