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चाय की चुस्‍कियों से बिहारियों के दिल में उतरने की कोशिश में मोदी

आम तौर पर बिहार की राजधानी में सुबह लोग फुटपाथ पर स्थित चाय की दुकानों पर देश की राजनीति की बात करते हैं। अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इन चाय की दूकानों को ‘नमो चाय’ के जरिए प्रचार का तरीका बना लिया है। ऐसे भी भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी (नमो) इन दिनों कई रैलियों में खुद के चाय बेचने की कहानी सुनाते रहे हैं। पटना के गांधी मैदान में 27 अक्टूबर को होने वाली ‘हुंकार रैली’ के प्रचार के लिए भाजपा ने राजधानी की चाय दुकानों का सहारा लिया है। पटना के फुटपाथ पर बने 30 से ज्यादा चाय दुकानों में एक बैनर लगाया गया है जिसके एक कोने में नरेन्द्र मोदी की तस्वीर लगी है और एक कोने में उस चाय दुकानदार की तस्वीर लगी है। इस पोस्टर को लगने के बाद कुछ दुकानदार तो स्पष्ट तो कुछ नहीं बोल पाते क्योंकि उन्हें ग्राहक के नाराज होने का डर भी है परंतु अधिकांश दुकानदार खुलकर बोल रहे हैं कि क्या मोदी का पोस्टर लगाना कोई अपराध है? इन बैनरों में सवाल के जरिए यह भी पूछा गया है कि ‘क्या एक चाय वाला देश का प्रधानमंत्री बन सकता है? अगर जवाब हां है तो पटना में होने वाली हुंकार रैली में जरूर आएं।’ इस मामले पर पटना के बांकीपुर क्षेत्र के विधायक नीतीन नवीन ने दिल्ली की रैली में मोदी ने अपने चाय बेचने की कहानी सुनाई थी। उसी कहानी को लेकर भाजपा चाय दुकानदारों से मोदी की निकटता पैदा कर रही है। उन्होंने इन बैनरों का सारा श्रेय दुकानदारों को देते हुए कहते हैं कि ये भी चाहते हैं कि एक चाय बेचने वाला देश का प्रधानमंत्री बने। चाय के दुकानदार भी इन बैनरों में लगे अपने फोटो को लेकर मन ही मन खुश हैं और वह भी मोदी के समर्थन की बात कर रहे हैं। दरियापुर स्थित बैनर लगाकर चाय बेच रहे एक चाय दुकानदार राहुल कुमार से बैनर के विषय में पूछने पर पहले तो वे झेंपते हैं। परंतु फिर कहते हैं कि वोट किसको देंगे यह तो अभी तक उन्हें भी नहीं मालूम परंतु मोदी को एक बार तो देश का प्रधानमंत्री बनना ही चाहिए। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय कहते हैं कि ‘नमो चाय’ पटना के लिए है और लोग उनके साथ हैं। भाजपा अलग विचार के साथ लोगों के बीच जा रही है। अब नमो टी के दुकानदार ही उनकी यात्रा के विषय में लागों को बता रहे हैं। बहरहाल, भाजपा ने ‘नमो चाय’ के जरिए प्रचार का अनोखा तरीका अपनाया है परंतु मोदी की पटना यात्रा और उनकी आकांक्षाओं पर यह प्रचार कितना कारगर होगा यह तो बाद में पता चलेगा

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