October 21, 2017

चन्द्रधर शर्मा गुलेरी जयंती समारोह सम्पन्न


धर्मशाला, जुलाई - हिन्दी साहित्य गगन पर पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी
का व्यक्तित्व ऐसे देवीण्यमान नक्षत्र के समान है जो अपने तेज एवं प्रकाश
से न केवल अपने युग को आलौकित करता रहा अपितु अपनी शाश्वत एवं अमर
कृतियों के माध्यम से युग-युगान्तरों तक उद्भाषित होता रहेगा। यह उद्गार
कृषि एवं ऊर्जा मंत्री, सुजान सिंह पठानिया ने आज गुलेर में पंडित
चन्द्रधर शर्मा गुलेरी की जयंती पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह की
अध्यक्षता करे हुए व्यक्त किए।
        श्री पठानिया ने बताया कि 20वीं शताब्दी के प्रारम्भिक चरण में श्री
गुलेरी जी का नाम साहित्य-सेवियों की प्रथम पंक्ति में लिया जाता रहा है।
उन्होंने कहा कि श्री गुलेरी जी एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उनके
द्वारा आयोजित की गई ख्याति ने प्रदेश एवं गुलेर क्षेत्र का नाम पूरे
विश्व में प्रसिद्ध किया है। उन्होंने कहा कि उनकी कहानियों, निबंधों और
पत्रकारिता का ऐतिहासिक योगदान तथा भाषाई ताजगी उनकी लेखकी क्षमता की
परिचायक है। उन्होंने हिन्दी की उन्नति, प्रगति और उसे राष्ट्रीय स्तर पर
स्थापित करने एवं जनप्रिय बनाने पर विशेष बल दिया। वह राष्ट्रीय स्तर पर
हिन्दी भाषा को राष्ट्र भाषा के रूप मेें सुसज्जित, परिस्थापित और
शोभायान बनाने के लिए आजीवन साधनारत रहे।
        ऊर्जा मंत्री ने बताया कि साहित्य के क्षेत्र में गुलेरी जी ने कवि,
कहानीकार, भाषाविद्, वैव्याकरण, निबंधकार, भाषा वैज्ञानिक, लोककला, लोक
संस्कृति, समीक्षक, संपादक और शैलीकरण के रूप में जो योगदान दिया है, वह
न केवल अप्रतिम है, बल्कि उन्हें अमरता प्रदान करने में सक्षम है।
उन्होंने कहा कि गुलेरी जी एक प्रगतिशील, देशभक्त चिंतक थे, वह अपने
सरकारी दायित्व और सर्विस रूल्स की सीमाओं के भीतर रहकर जो भी देश के लिए
अधिकतम कर सकते थे, वह सब कुछ कर गए। उनकी कविताओं एवं साहित्य में देश
प्रेम, राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत रहती थी।
        श्री पठानिया ने बताया कि प्रदेश सरकार ऐसे साहित्यकारों एवं देशभक्तों
के सम्मान में इस तरह के आयोजनों के माध्यम से उन्होंने सच्ची
श्रद्धाजंलि अर्पित कर रही है।
        इस अवसर पर क्षेत्र के प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ0 पीयूष गुलेरी द्वारा
गुलेरी जी के साहित्य में राष्ट्र चिंतन एवं डॉ0 गौतम व्यथित गुलेरी जी
की कहानियों में आंचलिकता विषय पर शोध-पत्रों का पाठन किया गया। जबकि
प्रदेशभर से आए 12 से अधिक  साहित्यकारों ने इन शोधपत्रों पर व्याख्यान
दिए। इसके उपरांत काव्य गोष्ठी का आयोजन भी किया गया।
        समारोह में चन्द्रधर गुलेरी की पौत्रबधु कीर्ति गुलेरी द्वारा भी उनके
साहित्य पर प्रकाश डाला गया। इस कार्यक्रम में निदेशक भाषा एवं संस्कृति,
अरूण कुमार शर्मा, जिला भाषा अधिकारी प्रवीण मनकोटिया एवं त्रिलोक
सूर्यवंशी, स्थानीय पंचायत की प्रधान श्रीमती निशा कुमारी एवं युवक मंडल
गुलेर के प्रधान सुक्रेत सहित अनेक साहित्यकार कवि एवं अन्य गणमान्य लोग
उपस्थित थे।

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